UPI चार्ज पर घमासान! सरकार बोली- विदेशी दबाव में नहीं लिया फैसला, राहुल गांधी ने कहा था- अमेरिका को होगा फायदा; मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

UPI Charge Controversy: UPI को लेकर सरकार के नए फैसले पर सियासी बहस शुरू हो गई है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि UPI के नियमों में किया गया बदलाव किसी विदेशी दबाव का नतीजा नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, UPI से संबंधित फैसले भारत की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं। सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि अब इस फैसले को वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।

इससे पहले राहुल गांधी ने UPI पर शुल्क लगाए जाने के फैसले पर सवाल उठाया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा था कि इस फैसले का फायदा अमेरिका को मिलेगा। राहुल ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग भी की थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनसे पूछा गया था कि उनका झुकाव लेफ्ट की ओर है या राइट की ओर, तो उन्होंने कहा था कि उनका झुकाव किसी तरफ नहीं है और उनकी सोच बिल्कुल सीधी है।

इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा, “मोदी जी का कॉन्सेप्ट ही अलग है। न वो बाईं तरफ हैं, न दाईं तरफ।” उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने आत्मसमर्पण करने का फैसला कर लिया है।

राहुल गांधी ने आगे आरोप लगाया कि UPI पर टैक्स लगाकर और अमेरिका को बड़ी रकम देकर भारत के हर नागरिक पर टैक्स लगाया गया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अमेरिका के सामने झुकना बंद करने और UPI से जुड़ा शुल्क वापस लेने की अपील की। राहुल गांधी ने कहा, “हिम्मत कीजिए और खड़े हो जाइए और UPI टैक्स को वापस लीजिए।”

नए नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL

UPI के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई है। याचिका में अदालत से सरकार के नए नियम को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।

दरअसल, सरकार ने मंगलवार को घोषणा की थी कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। खास बात यह है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि मर्चेंट से लिया जाएगा।

वहीं, ₹2,000 तक के UPI पेमेंट और Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। सरकार का कहना है कि करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन भी इस नए शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।

सरकार से जुड़े सूत्रों ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि UPI पर MDR लागू करने का फैसला हो चुका है और अब इसे वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।

नितिन कामथ ने ब्रोकिंग को लेकर उठाया सवाल

जिरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने भी नए UPI MDR ढांचे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि UPI का इस्तेमाल अब बड़े पैमाने पर हो रहा है, इसलिए MDR की जरूरत हो सकती है। हालांकि, उनके मुताबिक इन्वेस्टिंग और ब्रोकिंग जैसे मामलों में मौजूदा MDR व्यवस्था व्यावहारिक नहीं लगती।

कामथ ने कहा कि सामान्य मर्चेंट और ब्रोकर के कारोबार में बड़ा अंतर होता है।

नितिन कामथ ने उदाहरण से समझाया

कामथ के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक ₹20,000 का सामान खरीदता है और UPI के जरिए भुगतान करता है, तो मर्चेंट को उस बिक्री से सीधे कारोबार मिलता है। यानी पेमेंट का संबंध उसके रेवेन्यू से होता है।

इसके उलट, कोई ग्राहक UPI के जरिए ₹2 लाख अपने ट्रेडिंग अकाउंट में जमा कर सकता है और संभव है कि उसी दिन वह एक भी शेयर न खरीदे। ऐसी स्थिति में ब्रोकर को उस भुगतान से कोई ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिला, लेकिन UPI ट्रांजैक्शन से जुड़ा MDR खर्च उसके हिस्से में आ सकता है।

कामथ ने इसी अंतर को मौजूदा MDR व्यवस्था की प्रमुख समस्या के तौर पर सामने रखा है।

ये भी पढ़ेंः जहां डिमांड, वहीं किराये का कमरा; ऑनलाइन ग्राहक और बाइक टैक्सी से ड्रग्स की डिलीवरी, बिजनेस वीजा पर भारत आए दो विदेशियों के धंधे का खुलासा

UPI चार्ज पर विपक्ष ने भी सवाल उठाए

नए शुल्क को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं।

आम आदमी पार्टी के वारिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि सरकार के इस फैसले का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे छोटे व्यापारियों का डिजिटल कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

RJD नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं और अब ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर शुल्क लगाए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने इस फैसले को मोदी सरकार के ‘अच्छे दिन’ के दावे से जोड़ते हुए नोटबंदी और महंगाई का भी जिक्र किया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि महंगाई से पहले ही परेशान लोगों की मुश्किलें ऐसे फैसलों से और बढ़ सकती हैं।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी के आरोप पर कहा, “राहुलजी को हर जगह अमेरिका का भूत दिखता है। राष्ट्र निर्माण की कोई बात नहीं होती।” उन्होंने यह भी कहा कि UPI शुल्क ग्राहक से वसूलने की कोई सिफारिश नहीं की गई है।

NCP (SP) पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सीमा मलिक ने कहा कि पहले लोगों को UPI इस्तेमाल करने की आदत डाली गई और डिजिटल इंडिया का प्रचार किया गया। उनके मुताबिक, लोगों ने छोटे से छोटे भुगतान के लिए भी UPI को अपनाया है और अब ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगाने की बात हो रही है।

छोटे दुकानदारों के लिए पहले शुरू हुई थी इंसेंटिव योजना

सरकार ने UPI को बढ़ावा देने और इसे मुफ्त रखने के उद्देश्य से 2021-22 में इंसेंटिव योजना शुरू की थी। इसके तहत छोटे दुकानदारों को होने वाले ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर 0.15% इंसेंटिव दिया जाता था।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 तक इस योजना के तहत ₹8,276 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया। जून 2026 तक देश में करीब 55.5 करोड़ UPI यूजर्स होने की जानकारी दी गई है।

UPI कैसे काम करता है?

UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के जरिए बैंक अकाउंट से डिजिटल पेमेंट किया जाता है। इसके इस्तेमाल के लिए यूजर को पहले एक UPI ID या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस बनाना होता है, जिसे बैंक अकाउंट से लिंक किया जाता है।

इसके बाद भुगतान करने के लिए बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का नाम या IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं होती। UPI ID, मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए आसानी से पेमेंट किया जा सकता है।

ये भी पढ़ेंः UPI पर लगेगा चार्ज या नहीं? सरकार ने साफ किया नियम, ₹2,000 तक पेमेंट पर कोई फीस नहीं

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