TMC Symbol Row: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न ‘घास पर खिले जोड़ा फूल’ को लेकर चल रहे विवाद पर आज तस्वीर साफ हो सकती है। चुनाव आयोग गुरुवार को इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुना सकता है।
दरअसल, TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट और ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाला गुट आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा जता रहे हैं। इस विवाद को लेकर चुनाव आयोग आज दोपहर बाद दोनों गुटों की दलीलें सुनेगा।
उपचुनाव से पहले EC की सुनवाई अहम
TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने वाले हैं।
दोनों गुटों ने इन उपचुनावों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। ऐसे में चुनाव आयोग के सामने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट करना अहम हो गया है।
आयोग की कोशिश है कि उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले दोनों गुटों के दावों पर स्थिति स्पष्ट हो सके। इससे उम्मीदवारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में भी तस्वीर साफ हो सकती है।
दोनों गुटों को अलग-अलग समय दिया गया
चुनाव आयोग ने TMC के दोनों विरोधी धड़ों को गुरुवार को अलग-अलग समय पर सुनवाई के लिए बुलाया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को दोपहर 3 बजे आयोग के सामने अपने दस्तावेज और दलीलें रखने के लिए कहा गया है।
वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट को शाम 4 बजे अपनी बात रखने का समय दिया गया है। दोनों पक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपने-अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज और तर्क पेश करेंगे।
‘जोड़ा फूल’ को लेकर क्या होगा फैसला?
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल TMC के पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘घास पर खिले जोड़ा फूल’ को लेकर है। दोनों गुट इस चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं।
अब चुनाव आयोग की सुनवाई के बाद यह देखना अहम होगा कि पार्टी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न को लेकर आयोग क्या फैसला करता है। नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले आयोग का आदेश दोनों गुटों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आज की सुनवाई पर टिकी नजर
TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही यह लड़ाई अब चुनाव आयोग के सामने पहुंच चुकी है। दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया है। ऐसे में आज होने वाली सुनवाई के बाद विवाद की दिशा और आगे की चुनावी रणनीति को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।





