Masoud Pezeshkian: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधा। पजशकियान अपने साथ ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर लेकर पहुंचे। उन्होंने ईरान में मारे गए बच्चों की तस्वीरें दिखाईं और कहा कि ईरान आतंकवाद फैलाने वाला देश नहीं, बल्कि खुद आतंक का शिकार है।
पजशकियान ने कहा कि ईरान ने पिछले 200 वर्षों में किसी देश पर हमला नहीं किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर दी गई धमकियों और आरोपों का भी जवाब दिया।
‘ट्रंप हमें आतंकवादी कहते हैं, लेकिन हम खुद आतंक के शिकार’
पजशकियान ने कहा, “ट्रंप हमें आतंकवादी कहते हैं, लेकिन हम खुद आतंक के शिकार हैं। मैं उस ईरान से आया हूं, जहां हमारे सुप्रीम लीडर की बिना किसी वजह के हत्या कर दी गई।”
उन्होंने ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए हमले की तस्वीरें दिखाईं। बच्चों की तस्वीरों की ओर इशारा करते हुए पजशकियान ने कहा, “हमारे स्कूल पर बम गिराया गया। इन बच्चों को देखिए। इन बच्चों ने कोई अपराध नहीं किया था।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए इस हमले में 120 बच्चों समेत 156 लोगों की मौत हुई थी।
ट्रंप की धमकी का दिया जवाब
पजशकियान का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर दी गई धमकी के एक दिन बाद आया। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत और समझौते के लिए तैयार है, लेकिन दबाव और धमकियों की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अपने देश की सुरक्षा के लिए ईरान को किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है।
‘इजराइल के पास परमाणु बम, जांच ईरान की क्यों?’
पजशकियान ने इजराइल के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “परमाणु और न्यूक्लियर बम इजराइली शासन के हाथों में हैं, लेकिन निरीक्षकों से ईरान आने के लिए कहा जाता है।”
उन्होंने दावा किया कि इजराइल के पास परमाणु हथियार और सामूहिक विनाश के हथियार हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण का दबाव ईरान पर बनाया जाता है।
पजशकियान ने कहा कि इजराइल परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य नहीं है और उनके दावे के मुताबिक उसने निरीक्षण की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके बावजूद इजराइल को ऐसे साधन उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनसे वह क्षेत्र की किसी भी राजधानी पर हमला कर सकता है।
Iranian President Masoud Pezeshkian:
Atomic and nuclear bombs are in the hands of the Israeli regime, but the inspectors are requested to come to Iran.
Israel has murdered savagely over 70,000 innocents in Gaza, but Iran, while behind the table of negotiation, was bombed.… pic.twitter.com/0GNiCBTlhN
— Clash Report (@clashreport) September 23, 2026
गाजा में 70 हजार से ज्यादा मौतों का दावा
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में गाजा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “इजराइल ने गाजा में 70 हजार से ज्यादा निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या की है, जबकि ईरान बातचीत की मेज पर था और उसी दौरान उस पर बमबारी की गई।”
पजशकियान ने कहा कि फिलिस्तीन को नजरअंदाज करके दुनिया में स्थायी शांति की बात नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि दशकों से प्रस्ताव पारित होने के बावजूद फिलिस्तीन में कब्जा और हिंसा जारी है।
अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी निशाना
पजशकियान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर कहा कि इनका सबसे ज्यादा असर गरीब, बीमार और कमजोर ईरानी नागरिकों पर पड़ रहा है। उन्होंने अमेरिका पर आम लोगों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि किसी देश पर दबाव बनाने के लिए उसके आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
UN की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
पजशकियान ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और उसकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब गाजा, लेबनान और सीरिया में आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की मौत होती है, तो संयुक्त राष्ट्र प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाता।
उन्होंने UN को लेकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठन को सभी देशों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
‘हम कभी अपना सिर नहीं झुकाएंगे’
पजशकियान ने अपने भाषण के अंत में कहा कि ईरान प्रतिबंधों, दबाव और धमकियों के आगे नहीं झुकेगा।
उन्होंने कहा, “हम कभी अपना सिर नहीं झुकाएंगे और न ही घुटने टेकेंगे। बातचीत और समझौते के लिए तैयार हैं, लेकिन दबाव और ताकत की भाषा को स्वीकार नहीं करेंगे।”
ईरान में युद्ध से भारी नुकसान का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में ईरान में करीब 7,300 लोगों की मौत और 32,314 लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। करीब 1.49 लाख इमारतों के क्षतिग्रस्त होने और लगभग 32 लाख लोगों के घर छोड़ने की बात भी कही गई है।
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