Xi Jinping America Visit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका पहुंचे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद उनका स्वागत करने के लिए जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पहुंचे। विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का खुद एयरपोर्ट जाना सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं माना जाता। ट्रंप के साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप भी मौजूद थीं।
जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंची हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात को अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
आज व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर
जिनपिंग के सम्मान में आज रात व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद ट्रंप और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी।
इस बातचीत में व्यापार और टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ताइवान और रूस से जुड़े मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
ट्रेड और टैरिफ पर सबसे ज्यादा नजर
अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से ट्रेड और टैरिफ को लेकर तनाव रहा है। ट्रंप प्रशासन की ओर से चीनी सामान पर टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाया था।
अब दोनों देश टैरिफ कम करने और व्यापारिक तनाव को नियंत्रित करने के रास्ते तलाश रहे हैं। ऊर्जा और कृषि उत्पादों समेत दोनों देशों के सामान पर शुल्क घटाने को लेकर बातचीत चल रही है।
दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर मौजूदा सहमति 10 नवंबर को खत्म हो रही है। ऐसे में इसे आगे बढ़ाने और टैरिफ में और कटौती की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है।
US President Donald Trump welcomed Chinese President Xi Jinping to Washington for a three-day visit where the superpowers’ tensions over trade, technology and Tehran will play out against a backdrop of pomp and ceremony https://t.co/cyNjpzpPiz pic.twitter.com/BkHpaYSLnM
— Reuters (@Reuters) September 23, 2026
पहली बार AI पर अहम बातचीत
AI और अत्याधुनिक तकनीक अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा का नया बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। अमेरिका को अपनी AI तकनीक और एडवांस चिप्स के चीन तक पहुंचने की चिंता है। इसी वजह से चीन को AI चिप और दूसरी संवेदनशील तकनीकों की सप्लाई पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं।
चीन इन प्रतिबंधों का विरोध करता है और इसे तकनीकी व्यापार में बाधा बताता रहा है।
दोनों देशों के बीच AI को लेकर अलग से बातचीत शुरू करने पर सहमति बन चुकी है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े AI जोखिमों पर जानकारी साझा करने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा है।
ताइवान पर भी होगी चर्चा
ताइवान अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा में सहायता करता रहा है।
चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान से दूरी बनाए और उसे सैन्य मदद न दे। वहीं, ताइवान सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक सप्लाई और एशिया के रणनीतिक समुद्री रास्तों के कारण भी महत्वपूर्ण है।
ऐसे में ट्रंप-जिनपिंग बातचीत में ताइवान का मुद्दा अहम रह सकता है। हालांकि, बैठक में इस पर किसी बड़े समझौते की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
रूस से तेल खरीद पर भी नजर
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव भी बातचीत का हिस्सा बन सकता है। चीन रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदता है और रूस के साथ अपने व्यापार में तीसरे देशों के हस्तक्षेप का विरोध करता रहा है।
अमेरिका रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी देता रहा है। ऐसे में रूस और ऊर्जा व्यापार का मुद्दा ट्रंप-जिनपिंग बैठक में उठ सकता है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
ट्रंप और जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत का असर सिर्फ अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रह सकता। अगर दोनों देश टैरिफ कम करते हैं तो वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन में बदलाव हो सकता है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।
रूसी तेल भी भारत के लिए अहम मुद्दा है। भारत और चीन दोनों रूस से तेल खरीदते हैं। ऐसे में रूस पर अमेरिकी दबाव में बदलाव का असर भारतीय ऊर्जा बाजार और कारोबार पर भी देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा AI और सेमीकंडक्टर चिप्स को लेकर अमेरिका-चीन के बीच किसी नए समझौते या नियम का असर वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। भारत दोनों देशों के साथ व्यापार करता है, इसलिए भारतीय कंपनियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।






