Rahul Gandhi Election Commission Attack: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग, SIR (Special Intensive Revision) और मतदाता सूची को लेकर करीब 55 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण देश में ‘वोट चोरी’ हुई है।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार की CEC के पद पर नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन उनकी आपत्ति को नहीं माना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने CEC को कानून से ऊपर रखने की व्यवस्था बना दी है। हालांकि, ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें चुनाव आयोग स्वीकार नहीं करता।
‘ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी की’
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्ञानेश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए ‘वोट चोरी’, ‘कानून चोरी’ और ‘संस्था चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव में वोटों की चोरी हुई है, तो उसके आधार पर चुने गए सांसदों द्वारा बनाए गए कानूनों और किए गए संस्थागत बदलावों पर भी सवाल उठता है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और उन्हें इस पूरे मामले में ‘सरकारी गवाह’ (Approver) बनना चाहिए। उन्होंने अपने आरोपों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की जांच की बात भी कही।
‘चुनाव आयुक्त को जांच से छूट देने वाला कानून पास हुआ’
राहुल गांधी ने कहा कि 21 दिसंबर 2023 को ऐसा कानून पारित किया गया, जिससे चुनाव आयुक्तों को जांच से सुरक्षा मिली। उन्होंने दावा किया कि 7 फरवरी को महाराष्ट्र को लेकर कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘वोट चोरी’ के आरोपों के सबूत सामने रखने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री को असहमति पत्र दिया था। राहुल ने कहा कि स्वतंत्र चुनाव आयोग के लिए चुनाव आयुक्तों और CEC के चयन की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी राय को दरकिनार कर दिया गया।
हालांकि, 2023 का कानून मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया से संबंधित है। इस कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी लंबित है और बुधवार को दो जजों की पीठ ने मामले को बड़ी संविधान पीठ के गठन पर विचार के लिए CJI के पास भेजा।
VIDEO | Delhi: Addressing a press conference, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, “Now, I am certain, I have no doubt, that within the next six months, this will be black and white in front of you. Because the information is already available. So, I’d like to go into a little bit of… pic.twitter.com/I9unZ240V1
— Press Trust of India (@PTI_News) September 24, 2026
ये भी पढ़ेंः ओडिशा तट से टकराएगा चक्रवाती तूफान! 5,000 लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए, आंध्र-बंगाल में भी अलर्ट
‘वोट खत्म हुआ तो संविधान काम नहीं करेगा’
राहुल गांधी ने कहा, “चुनाव आयोग संस्थागत रूप से वोट का संरक्षक है। वोट की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। अगर वोट खत्म कर दिया जाता है, तो संविधान काम नहीं करता, कानून अवैध हो जाते हैं और संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता।”
राहुल गांधी ने आगे कहा, “मैं हवा में बात नहीं कर रहा हूं। मैंने इसे सबूतों के साथ दिखाया है। मैं आपको बता दूं कि पहले से ही इतनी जानकारी मौजूद है, जिससे यह 100 प्रतिशत निश्चित है, 99 प्रतिशत नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत कि भारत में चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024 और विधानसभा चुनावों में धांधली हो रही है।”
VIDEO | Delhi: Addressing a press conference, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, “The Election Commission is the institutional protector of the vote. It is their responsibility to protect the vote. And everything arises from there. If the vote is destroyed, the Constitution does… pic.twitter.com/IiaN3qK8De
— Press Trust of India (@PTI_News) September 24, 2026
‘कई स्तरों पर लोग वोटर डेटा में बदलाव कर सकते हैं’
राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता सूची और डेटा में बदलाव की पहुंच केवल शीर्ष स्तर के अधिकारियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “अलग-अलग स्तरों पर कई लोग हैं। अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग तरह की पहुंच है और अलग-अलग लोग मतदाताओं को इधर-उधर कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल शीर्ष स्तर के लोग ही ऐसा कर सकते हैं। कई स्तरों पर यह किया जा सकता है।”
VIDEO | Responding to a PTI question on whether Congress will ask the Election Commission to reveal which officials can edit electoral rolls and data at the national, state, district or constituency level, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, “There are multiple people at multiple… pic.twitter.com/ORKjqpw9rX
— Press Trust of India (@PTI_News) September 24, 2026
‘BJP के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी क्यों नहीं आई?’
राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की राजनीति में सरकारों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया रही है। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध में जीत के बाद भी कुछ समय बाद उन्हें एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ा।
राहुल ने सवाल किया कि फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और BJP के खिलाफ वैसी एंटी-इनकंबेंसी क्यों नहीं दिखाई दी। उन्होंने इसका कारण चुनावों में कथित गड़बड़ी को बताया और ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए।
SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है, जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।
इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की है।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने इन घटनाक्रमों को अलग तरीके से पेश किया है। आयोग के मुताबिक, सदस्यों द्वारा लिखित टिप्पणियां, तकनीकी इनपुट और आंतरिक समीक्षा चुनाव आयोग की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके फैसलों को कानूनी आधार प्राप्त है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
इस तरह ‘वोट चोरी’, चुनाव में धांधली और CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर राहुल गांधी और चुनाव आयोग के दावों में स्पष्ट अंतर है। राहुल गांधी इन आरोपों को चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया और फैसलों को कानूनी रूप से समर्थित बताया है।





