Chhattisgarh High Court Divorce Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पति की तलाक की याचिका खारिज कर दी। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उसे ‘काला और मोटा’ कहकर ताने देती थी। कोर्ट ने कहा कि केवल इस तरह के आरोप तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।
जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही पत्नी की ओर से दायर स्त्रीधन वापस करने की याचिका को मंजूर किया था।
2019 में हुई थी दोनों की शादी
मामला जांजगीर-चांपा जिले का है। 28 वर्षीय अक्ष घोष की शादी रायगढ़ जिले की 25 वर्षीय पूजा सीत से 7 मार्च 2019 को हुई थी। शादी के बाद पत्नी करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही।
पति ने आरोप लगाया कि इस दौरान पत्नी उसके साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार करती थी, उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और अक्सर मायके चली जाती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसकी अनुमति के बिना एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने राजस्थान चली गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी।
पति के मुताबिक, इसके बाद पत्नी का जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया।
ये भी पढ़ेंः मशरूम सूप से तिल वाली मछली तक… जिनपिंग के लिए ट्रंप के स्टेट डिनर में क्या-क्या परोसा गया?
पत्नी ने पति पर लगाया दूसरी महिला से संबंध का आरोप
पत्नी ने पति की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया। उसने आरोप लगाया कि उसके पति का दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध था और इस बारे में जानकारी मिलने के बाद उसने शराब पीना शुरू कर दिया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति उसके साथ दुर्व्यवहार करता था और गर्भावस्था के दौरान उसे उचित इलाज नहीं दिया गया। बीमार होने पर उसकी मां उसे रायगढ़ के अस्पताल ले गई थी।
महिला के मुताबिक, ठीक होने के बाद उसने पति और उसके परिवार से उसे वापस ले जाने का अनुरोध किया, लेकिन वे उसे लेने नहीं आए। इसके बाद उसकी मां ने 24 फरवरी 2020 को रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की।
महिला ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति और उसके परिवार के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायगढ़ के सामने भी कार्यवाही शुरू की थी।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की तलाक की याचिका?
हाईकोर्ट ने मामले में पेश किए गए सबूतों की जांच के बाद कहा कि पति अपनी पत्नी की ओर से क्रूरता और परित्याग साबित करने में विफल रहा।
कोर्ट ने कहा कि पति ने पत्नी पर कई आरोप लगाए, लेकिन उन्हें ठोस सबूतों के जरिए साबित नहीं किया जा सका। अदालत ने यह भी कहा कि पत्नी द्वारा पति को काले रंग या मोटे शरीर वाला बताने का आरोप तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
कोर्ट के मुताबिक, पति यह भी साबित नहीं कर सका कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के अपने माता-पिता के साथ रह रही थी। साथ ही, पत्नी की ओर से वैवाहिक संबंध छोड़ने की मंशा भी साबित नहीं हुई।
फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए पति की तलाक की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने अपील बिना किसी लागत के खारिज करते हुए डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया।
यानी सिर्फ ‘काला और मोटा’ कहे जाने के आरोप को, इस मामले के तथ्यों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर, हाईकोर्ट ने तलाक देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
ये भी पढ़ेंः राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला- बोले, ‘CEC ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी की, सरकार ने उन्हें कानून से ऊपर रखा’





