Iran Hormuz Strait Control: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल अपने खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने कहा कि होर्मुज ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़ा मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
होर्मुज पर ईरान का सख्त रुख
ईरानी राजदूत ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की हर कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी समुद्री सीमाओं और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन के सीजफायर की चर्चा
इसी बीच समाचार एजेंसी AP की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान 60 दिन के सीजफायर MoU (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर सहमत हो गए हैं। हालांकि इस समझौते को अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य मौजूदा तनाव को कम करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू करना है। अगर यह समझौता लागू होता है तो क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका कुछ समय के लिए कम हो सकती है।
जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी
प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के जारी रखने पर सहमति बनी है। यह फैसला वैश्विक व्यापार और तेल बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज में किसी भी तरह का तनाव सीधे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करता है।
मध्य-पूर्व पर दुनिया की नजर
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित सीजफायर समझौते को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो लंबे समय से जारी तनाव में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन होर्मुज को लेकर ईरान का सख्त रुख आने वाले दिनों में नई भू-राजनीतिक चुनौतियां भी पैदा कर सकता है।
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