Islamabad Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने और संभावित सीजफायर की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक पहल होने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अहम वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित की जाएगी, जहां दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे। इस पूरे डिप्लोमैटिक घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में शांति स्थापना की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
यह बैठक इस्लामाबाद स्थित लग्जरी होटल सेरेना होटल इस्लामाबाद में होने की संभावना है। सुरक्षा और कूटनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने राजधानी में विशेष इंतजाम किए हैं और दो दिन की छुट्टी भी घोषित की गई है। पाकिस्तान इस वार्ता में मेजबान की भूमिका निभा रहा है, जिससे उसकी कूटनीतिक स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) करेंगे, जो आज इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। उनके साथ अमेरिकी टीम में विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ (Steve Witkoff) और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार जारेड कुशनेर (Jared Kushner) शामिल होंगे। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता और संभावित सीजफायर को लेकर बेहद अहम है।
ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) इस वार्ता में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। ईरान का रुख इस बातचीत में अपने रणनीतिक हितों, सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर केंद्रित रहने की संभावना है।
बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिनमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम प्रमुख है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को सीमित या बंद करे और न्यूक्लियर सुविधाओं पर कड़ी निगरानी स्वीकार करे। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी बड़ा मुद्दा है, जहां अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला और सुरक्षित रहे, जबकि ईरान इस पर नियंत्रण और ट्रांजिट फीस की बात करता है।
इसके साथ ही अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को सीमित करना चाहता है, जिसे वह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। वहीं ईरान की मुख्य मांग है कि सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं, फ्रीज की गई संपत्तियां वापस की जाएं और आर्थिक नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक पश्चिम एशिया में तनाव कम करने, वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने और अमेरिका-ईरान संबंधों में नई शुरुआत का संकेत दे सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद अभी भी बने हुए हैं, लेकिन बातचीत की शुरुआत को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।







