PoK में आरक्षित सीटों के विरोध में हिंसा, पुलिस-प्रदर्शनकारियों की झड़प में 11 की मौत, 70 से ज्यादा घायल

PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा की आरक्षित सीटों को लेकर चल रहा विवाद हिंसक रूप ले चुका है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भीषण झड़पों में अब तक 11 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 7 नागरिक और 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

क्या है पूरा मामला?

PoK में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC का आरोप है कि इन सीटों के कारण स्थानीय आबादी का प्रतिनिधित्व कम हो जाता है और राजनीतिक लाभ कुछ चुनिंदा परिवारों तक सीमित रह जाता है।

संगठन लगातार इन सीटों को खत्म करने और स्थानीय लोगों के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग कर रहा है।

JAAC पर प्रतिबंध के बाद बढ़ा तनाव

PoK सरकार ने 5 जून को आतंकवाद विरोधी कानूनों का हवाला देते हुए JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का कहना है कि संगठन की गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थीं। प्रतिबंध के बाद पुलिस ने संगठन के कई समर्थकों और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई लोगों को हिरासत में लिया।

इसी कार्रवाई के विरोध में क्षेत्र में प्रदर्शन तेज हो गए और हालात लगातार बिगड़ते चले गए।

अस्पताल के बाहर शुरू हुआ संघर्ष

रविवार को JAAC कार्यकर्ता अपने एक सदस्य की मौत के विरोध में अस्पताल के शवगृह के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। संगठन का आरोप है कि उनके सदस्य की मौत पुलिस फायरिंग में हुई थी। जब पुलिस प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई स्थानों पर गोलीबारी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।

11 लोगों की मौत, 70 से ज्यादा घायल

प्रशासन के अनुसार हिंसा में 11 लोगों की जान गई है। इनमें 4 पुलिसकर्मी और 7 नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 23 सुरक्षाकर्मी और लगभग 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

पुलिस ने अब तक 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और हिंसा फैलाने वालों की पहचान की जा रही है।

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पुलिस और प्रशासन का दावा

रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद खान के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी की, जिसमें चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें छह प्रदर्शनकारी मारे गए।

वहीं पुलिस का आरोप है कि JAAC से जुड़े लोगों ने शॉटगन और अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया। प्रशासन ने इस घटना को आतंकवादी प्रकृति की कार्रवाई बताते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक चुनौती

PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं। ऐसे समय में आरक्षित सीटों को लेकर भड़की हिंसा क्षेत्रीय सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले बढ़ा यह विवाद आने वाले दिनों में PoK की राजनीति को और अधिक अस्थिर कर सकता है।

आरक्षित सीटों को लेकर क्यों है विरोध?

विवाद की जड़ वे 12 सीटें हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे लोगों के लिए आरक्षित हैं। इनमें 1947, 1965 और 1971 के युद्धों या बाद के संघर्षों के दौरान विस्थापित हुए लोग शामिल हैं।

JAAC का कहना है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय जनता की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित होती है। संगठन मांग कर रहा है कि इन सीटों को समाप्त कर स्थानीय आबादी के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए।

फिलहाल तनाव बरकरार

हिंसा के बाद पूरे PoK में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन प्रतिबंध, गिरफ्तारियों और मौतों के बाद हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। चुनाव से पहले यह संकट PoK की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

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