Hydrogen Train: भारत रेलवे के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही भारत हाइड्रोजन ईंधन से ट्रेन संचालन करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन जाएगा। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन हो रहा है।
यह परियोजना भारतीय रेलवे की हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। रेलवे का लक्ष्य भविष्य में स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है।

89 किलोमीटर का सफर, 14 स्टेशनों पर ठहराव
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच लगभग 89 किलोमीटर लंबे रूट पर चलेगी। यह दूरी करीब 2 घंटे में पूरी करेगी। ट्रेन में 10 कोच होंगे और यह रास्ते में 14 स्टेशनों पर रुकेगी। इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यात्रियों के लिए किराया 5 रुपए से 25 रुपए के बीच रखा गया है, ताकि आम लोग भी इस आधुनिक तकनीक का अनुभव कर सकें।
India’s First Hydrogen-Powered Train: Advancing Green Rail Mobility
▪️Indian Railways is entering a new era of clean and sustainable transportation
▪️With the inauguration on 17 July 2026, the hydrogen fuel cell-powered train is set to begin operations
▪️It will run on the… pic.twitter.com/JUYVv9eYUl
— PIB India (@PIB_India) July 16, 2026
भारत बना दुनिया का पांचवां देश
हाइड्रोजन फ्यूल तकनीक अपनाने के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां इस तकनीक पर आधारित ट्रेनें संचालित होती हैं। वर्तमान में जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत ने स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेलवे नेटवर्क की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
VIDEO | Prime Minister Narendra Modi is set to flag off India’s first hydrogen-powered train between Jind and Sonipat in Haryana on Friday, marking a significant milestone in the Indian Railways’ push towards clean, sustainable, and eco-friendly mobility.
(Source: Third Party)… pic.twitter.com/20VjpbHF4w
— Press Trust of India (@PTI_News) July 16, 2026
₹112 करोड़ की लागत से तैयार हुई परियोजना
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर करीब 112 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस राशि में ट्रेन को हाइड्रोजन तकनीक के अनुरूप विकसित करने के साथ-साथ हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण (स्टोरेज) और रीफ्यूलिंग की आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
ट्रेन का डिजाइन और इंटीग्रेशन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है। इस परियोजना में तीन प्रमुख संस्थाओं ने मिलकर काम किया है। ICF चेन्नई ने ट्रेन का निर्माण और तकनीकी रूपांतरण किया, मेधा सर्वो ड्राइव्स ने हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित किया, जबकि ग्रीनएच इलेक्ट्रोलिसिस ने जींद में हाइड्रोजन उत्पादन और रीफ्यूलिंग प्लांट स्थापित किया।

ये भी पढ़ेंः
जगन्नाथ रथयात्रा 2026: अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा शुरू, अमित शाह ने की मंगला आरती
जींद में बना देश का पहला हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग प्लांट
जींद रेलवे स्टेशन के पास देश का पहला हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग प्लांट तैयार किया गया है। यहां इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक के जरिए पानी से प्रतिदिन लगभग 430 किलोग्राम हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। प्लांट में करीब 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन सुरक्षित रखने की क्षमता है, जबकि ट्रेन में एक बार में लगभग 440 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी। हाइड्रोजन को हाई-प्रेशर टैंकों में सुरक्षित रखा जाएगा।
पर्यावरण के लिए क्यों खास है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेनें डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती हैं। इनमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल बिजली उत्पन्न करती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता और केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश स्वच्छ परिवहन के लिए इस तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।

पीएम मोदी करेंगे कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन
हाइड्रोजन ट्रेन को रवाना करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वे एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, दो मेडिकल कॉलेजों समेत कुल 9 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं से हरियाणा में परिवहन, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा के नाम पहले भी दर्ज है रिकॉर्ड
हरियाणा इससे पहले भी भारतीय रेलवे में नई तकनीक की शुरुआत का गवाह रहा है। 13 जनवरी 2015 को देश की पहली सीएनजी (CNG) आधारित DEMU ट्रेन रेवाड़ी और रोहतक के बीच चलाई गई थी। तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने उसे हरी झंडी दिखाई थी। हालांकि वर्तमान में उस ट्रेन का संचालन डीजल ईंधन पर किया जा रहा है।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो रेलवे अन्य रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का विस्तार कर सकता है।

ये भी पढ़ेंः
भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, व्हिस्की, कारें और कपड़े होंगे सस्ते; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे






