Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार और गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार आठवीं रात भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने खुद इन हमलों को मंजूरी दी थी। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और अमेरिका अपने नागरिकों तथा सैनिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस बार के हमलों में ईरान के सैन्य अड्डों, हथियारों के भंडार, मिसाइल लॉन्च साइट्स और लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पैदा हो रहे खतरे को कम करना है।
जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला
इससे पहले जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक सल्ती एयरबेस पर देर रात मिसाइल हमला हुआ था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य सैनिक घायल हुए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, हालांकि उसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरान ने अब तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और न ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।
Video captures the moment that several Iranian medium to intermediate-range ballistic missiles struck Muwaffaq Salti Air Base in Jordan overnight, killing at least two and injuring several other American Servicemembers. pic.twitter.com/cJz39E1LvP
— OSINTdefender (@sentdefender) July 18, 2026
16 पहुंची अमेरिकी सैनिकों की मौत की संख्या
जॉर्डन में हुए ताजा हमले के बाद इस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। लगातार बढ़ते सैन्य नुकसान के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व में व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है।
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सैन्य ठिकानों पर फोकस, नागरिक ढांचे पर भी दावे
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी हमलों के दौरान ईरान के कुछ पुलों और जल शोधन (डिसैलिनेशन) संयंत्रों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनका निशाना केवल सैन्य प्रतिष्ठान हैं और नागरिक ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
आठ दिनों से लगातार जारी है अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिका लगातार आठ रातों से ईरान में अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले कर रहा है। इन हमलों में मिसाइल भंडार, ड्रोन लॉन्चिंग साइट, रडार सिस्टम और कमांड सेंटर को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर ईरान समर्थित समूह भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
मध्य-पूर्व में बढ़ी चिंता
लगातार जारी सैन्य कार्रवाई के बीच मध्य-पूर्व के कई देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
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