Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी, पितृसत्ता और लैंगिक भेदभाव के मुद्दे पर विस्तार से बात की। करीब 1 घंटे 16 मिनट के अपने संबोधन में राहुल ने कहा कि महिलाओं की पहचान उनके पिता, पति या बेटे से नहीं, बल्कि उनकी अपनी पहचान से होनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं से डरने के बजाय अपनी आवाज बुलंद करने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की अपील की।
राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को तीन हिस्सों में बांटा। उन्होंने कहा कि पहली हिंसा पैदा होते ही हत्या, दूसरी शारीरिक अत्याचार और तीसरी आर्थिक बंदिशें हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, नौकरी, संपत्ति और अपने फैसले खुद लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।
पुणे म्हणजे प्रेम ❤️ pic.twitter.com/10FVTw4cOd
— Congress (@INCIndia) August 22, 2026
‘महिला की पहचान पिता, पति या बेटे से नहीं’
राहुल गांधी ने कहा कि महिला का पिता, पति और बेटे से रिश्ता जरूर है, लेकिन उसकी पहचान इन रिश्तों से नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी पर निर्भर मानने की मानसिकता को बदलने की जरूरत है।
मनुस्मृति का जिक्र करते हुए राहुल ने महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने वाली मानसिकता बताया।
‘महिलाओं को नियंत्रित करने के चार तरीके’
राहुल ने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने के चार तरीके हैं- हिंसा, अपमान या अनादर, समय और कंट्रोल। उन्होंने कहा कि लड़कियों को अक्सर यह बताया जाता है कि उन्हें कब घर से निकलना है और कब वापस आना है।
उन्होंने कहा कि लड़के देर शाम या रात तक बाहर रह सकते हैं, लेकिन लड़कियों के लिए एक निश्चित समय तय कर दिया जाता है। राहुल ने इसे महिलाओं की आजादी पर लगने वाला ‘टाइम का ताला’ बताया।
शादी और घरेलू काम से लड़कियों की पढ़ाई प्रभावित
राहुल गांधी ने कहा कि समाज में आज भी ऐसी सोच मौजूद है जिसमें लड़के की पढ़ाई को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि लड़की को शादी और घरेलू जिम्मेदारियों की ओर धकेल दिया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि 45% लड़कियां शादी या घरेलू काम के कारण पढ़ाई छोड़ देती हैं। राहुल ने यह भी कहा कि देश में सिर्फ 8% महिलाओं के पास स्वतंत्र रूप से उनके नाम पर संपत्ति है। उनके मुताबिक, यह महिलाओं पर आर्थिक नियंत्रण की स्थिति को दिखाता है।
‘60% लड़कियां घर से अकेली नहीं निकल सकतीं’
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में दावा किया कि 60% लड़कियां घर से अकेली नहीं निकल सकतीं। उन्होंने कहा कि कई परिवारों में लड़कियों को बाहर जाने के लिए किसी पुरुष या परिवार के सदस्य के साथ जाने की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर देने के साथ-साथ उन्हें अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने की आजादी भी मिलनी चाहिए।
ये भी पढ़ेंः
अखिलेश के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर जयंत चौधरी का पलटवार, बोले- जाट समाज को निशाना न बनाएं
‘बी लाउड, बी प्राउड एंड फाइट फॉर योरसेल्फ’
राहुल गांधी ने छात्राओं से कहा कि वे डरें नहीं और अपनी बात खुलकर रखें। उन्होंने कहा कि लड़कियों को “Be loud, be proud and fight for yourself” के संदेश के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के भीतर मौजूद डर को खत्म करना जरूरी है और पितृसत्ता की सोच के खिलाफ मिलकर आवाज उठानी होगी।
𝑺𝒎𝒂𝒔𝒉 𝒕𝒉𝒆 𝒑𝒂𝒕𝒓𝒊𝒂𝒓𝒄𝒉𝒚.
𝑩𝒆 𝑳𝒐𝒖𝒅, 𝑩𝒆 𝑷𝒓𝒐𝒖𝒅, 𝑭𝒊𝒈𝒉𝒕 𝑭𝒐𝒓 𝒀𝒐𝒖𝒓 𝑺𝒑𝒂𝒄𝒆.
: LoP Shri @RahulGandhi pic.twitter.com/1fVXD7VjjG
— Congress (@INCIndia) August 22, 2026
‘लड़के गाली दें तो अलाऊ, लड़की दे तो शोभा नहीं’
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि लड़कों और लड़कियों के व्यवहार को अलग-अलग नजर से देखने वाली मानसिकता को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर लड़के गाली देते हैं तो उसे स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन लड़की गाली दे तो कहा जाता है कि यह उसे शोभा नहीं देता।
उन्होंने इसे ‘मनुस्मृति का माइंडसेट’ बताते हुए कहा कि इसी सोच के कारण महिलाओं को नियंत्रित करने और उनकी आजादी सीमित करने की कोशिश होती है।
महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है और आज हमारी लड़ाई इसी माइंडसेट से है।
BJP-RSS के लोग चाहते हैं कि लड़कियां/महिलाएं पिंजरे में बंद रहें।
लेकिन हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि सम्मान सभी का हो।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 पुणे,… pic.twitter.com/8fxhL8g9aT
— Congress (@INCIndia) August 22, 2026
छात्राओं से बोले- ‘पिंजरा तोड़ो’
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्राओं से कहा कि उन्हें समाज की उन बंदिशों को तोड़ना होगा, जो उनकी शिक्षा, नौकरी और स्वतंत्र जीवन के रास्ते में आती हैं।
उन्होंने कहा कि लड़कियों को डरकर या दबकर रहने के बजाय अपनी आवाज उठानी चाहिए और अपने लिए लड़ना चाहिए। राहुल ने महिलाओं की आजादी को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी।
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर पांच छात्राओं से बातचीत भी की। एक छात्रा ने MPSC परीक्षा में कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए उनसे मदद की अपील की। वहीं, एक अन्य छात्रा ने महिला खिलाड़ियों के साथ हुए कथित गलत व्यवहार और न्याय मिलने में देरी को लेकर सवाल किया।
राहुल गांधी ने छात्राओं से कहा कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी और उस ‘पिंजरे’ को तोड़ना होगा, जिसमें समाज महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करता है।
ये भी पढ़ेंः





