BRICS Summit 2026: BRICS समिट का आज आखिरी दिन है। आज ओपन मीटिंग होगी, जिसमें सदस्य देशों के नेता और आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे। बैठक में BRICS से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
समिट के पहले दिन भारत ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS देशों के बीच स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जारी है। इसका उद्देश्य देशों के बीच कारोबार को आसान बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है।

BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी
BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई अहम मुद्दों पर साझा बयान जारी किया गया।
डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकवादियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग को रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी।
BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति ऐसे समय बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं।
BRICS समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें
- अगले 20 साल का नया एजेंडा बनाएं: PM मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा तैयार करने और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव दिया।
- ग्लोबल साउथ नियम बनाने में हिस्सा ले: मोदी ने AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी पर जोर दिया।
- युवाओं को तैयार करें: उन्होंने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून की ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया।
- नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बने: मुसीबत में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकालने के लिए देशों के बीच एक नेटवर्क बनाने की बात कही गई।
- भविष्य सबका, फैसला भी सबका: PM मोदी ने कहा कि दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।

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तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने की बातचीत
BRICS समिट से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की।
दोनों नेताओं की बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं।
हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ वर्षों से अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में तनाव के बीच दोनों राष्ट्रपतियों की मुलाकात को बातचीत का रास्ता खुला रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती
BRICS देश आपसी कारोबार में डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए सदस्य देश एक-दूसरे की स्थानीय करेंसी में लेन-देन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
इसके साथ ही अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या साझा करेंसी नहीं है।
भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी स्थानीय करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए।
इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर लेन-देन के लिए डॉलर की जरूरत कम हो सकती है।
एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम
BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था।
उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में बताया था।
उस समय BRIC कोई संगठन नहीं था। 2006 में चारों देश साथ आए और BRIC समूह बना। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई।
2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। इसके बाद ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने।
आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी करीब 14% है।
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