BRICS डिनर में नॉन-वेज क्यों नहीं? राहुल गांधी के सवाल पर रिजिजू का पलटवार, बोले- कांग्रेस खाने पर भी कर रही राजनीति

c: BRICS समिट के दौरान 12 सितंबर को आयोजित डिनर के मेन्यू को लेकर सियासत गरमा गई है। डिनर में पूरी तरह शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाया। राहुल ने भारत में नॉन-वेज खाने वालों की संख्या का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने छोले-भटूरे की तस्वीर भी साझा की।

राहुल गांधी ने नॉन-वेज खाने का आंकड़ा बताया

राहुल गांधी ने X पर लिखा कि भारत में 80 फीसदी लोग नॉन-वेजेटेरियन हैं। उन्होंने कहा कि भारत का नॉन-वेज खाना बहुत स्वादिष्ट होता है। हालांकि, राहुल गांधी ने इस आंकड़े का कोई स्रोत अपनी पोस्ट में नहीं बताया।

रिजिजू बोले- खाने के मेन्यू पर भी राजनीति

राहुल गांधी के पोस्ट पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी अब BRICS देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है।

रिजिजू ने कहा कि भारत आए विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया। उन्होंने बताया कि खाना स्वाद और पोषण से भरपूर था और उसमें देश के अलग-अलग हिस्सों की खान-पान की परंपराओं की झलक दिखाई गई।

गिरिराज सिंह बोले- राहुल की सोच की सीमा बस यहीं तक

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सोच की सीमा बस यहीं तक रह गई है।

BRICS डिनर में क्या था मेन्यू?

12 सितंबर को आयोजित डिनर में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता, गुजराती खांडवी और मिलेट्स का पुलाव परोसा गया था। इसके अलावा कश्मीर की मशरूम डिश भी मेन्यू में शामिल थी।

मिठाई में फ्रूट क्रीम के साथ जलेबी परोसी गई। डिनर के शाकाहारी मेन्यू को लेकर ही राहुल गांधी ने सवाल उठाया था।

पवन खेड़ा ने भी बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी का भारतीयों पर अपनी खान-पान संबंधी पसंद थोपना पहले से ही समस्या है और अब दुनिया भर से आए गणमान्य लोगों पर भी अपनी पसंद थोपने की कोशिश की जा रही है।

पवन खेड़ा ने भारत की विविध खान-पान संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि देश में मांसाहारी व्यंजनों की भी कई बेहतरीन किस्में हैं, जिन्हें लोग पसंद करते हैं।

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वारिस पठान बोले- फूड कल्चर को सीमित मत करिए

AIMIM विधायक वारिस पठान ने भी डिनर के मेन्यू पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता की बात बहुत की जाती है, लेकिन इस मेन्यू से विविधता गायब कर दी गई।

उन्होंने कहा कि शाकाहारी भोजन को प्रमोट करना है तो जरूर किया जाए, लेकिन भारत की फूड कल्चर को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। पठान ने कहा कि देश में करोड़ों लोग नॉन-वेज खाते हैं।

80% नॉन-वेजेटेरियन का आंकड़ा आधिकारिक नहीं

राहुल गांधी की पोस्ट में भारत में 80 फीसदी नॉन-वेजेटेरियन होने के आंकड़े का स्रोत नहीं दिया गया। उपलब्ध NFHS-5 के आंकड़ों के मुताबिक, 2019-21 के दौरान 15 से 49 साल की उम्र के 83.4% पुरुष और 70.6% महिलाएं कम से कम कभी-कभार मछली, चिकन या मांस का सेवन करती थीं।

वहीं, 2023-24 के NFHS-6 में मांसाहारी भोजन के सेवन को लेकर ऐसा तुलनात्मक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

क्या है डिनर डिप्लोमेसी?

BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में डिनर सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं होता। इसे डिनर डिप्लोमेसी’ भी कहा जाता है, जिसमें नेता औपचारिक बैठकों और प्रोटोकॉल से अलग अनौपचारिक माहौल में बातचीत करते हैं।

ऐसे आयोजनों में नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद बढ़ाने, आपसी विश्वास बनाने और कई मुद्दों पर सहज बातचीत का अवसर मिलता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में डिनर को कूटनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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