Navodaya School Controversy: तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के रुख पर कड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि अगर हर राज्य केंद्र की नीतियों को मानने से इनकार करने लगे, तो देश का संघीय ढांचा कैसे चलेगा। अदालत ने तमिलनाडु को राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में दिए अपने आदेश को वापस लेने की तमिलनाडु सरकार की मांग भी खारिज कर दी। हालांकि, राज्य को जमीन चिन्हित करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
‘हर राज्य केंद्र की नीति नकारेगा तो संघीय ढांचे का क्या होगा?’
सुनवाई के दौरान पीठ ने सहकारी संघवाद की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सवाल किया कि अगर केंद्र सरकार समवर्ती सूची के किसी विषय पर नीति बनाती है और हर राज्य यह कहने लगे कि वह उस नीति को स्वीकार नहीं करता, तो देश का संघीय ढांचा कैसे चलेगा।
अदालत ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच संवाद और सहयोग होना चाहिए। पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि चेन्नई और दिल्ली के बीच ऐसा कोई अलगाव नहीं होना चाहिए और दोनों पक्षों को मिलकर गतिरोध का समाधान निकालना चाहिए।
तमिलनाडु की आदेश वापस लेने की मांग खारिज
तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने दिसंबर 2025 के आदेश को वापस लेने की मांग की। उस आदेश में राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन की पहचान करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने राज्य को जमीन की पहचान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया मामले में लंबित स्पेशल लीव पिटीशन के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
हिंदी और त्रि-भाषा नीति पर भी हुई बहस
तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों का विरोध लंबे समय से भाषा नीति से जुड़े मुद्दे पर रहा है। राज्य सरकार दो-भाषा नीति का समर्थन करती है, जबकि नवोदय विद्यालयों की भाषा व्यवस्था को लेकर राज्य की आपत्ति रही है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने राज्य के रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सोच बदलने की जरूरत है। अदालत ने इस संदर्भ में हिंदी को लेकर तमिलनाडु की आपत्ति का भी जिक्र किया।
तमिलनाडु की ओर से हालांकि कहा गया कि राज्य हिंदी का विरोधी नहीं है और वहां कई स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती है। राज्य की आपत्ति नवोदय विद्यालय योजना और उससे जुड़ी भाषा नीति को लेकर है।
केंद्र उठाएगा स्कूल के निर्माण और संचालन का खर्च
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु सरकार को केवल स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध करानी होगी। स्कूल के निर्माण और संचालन का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।
केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि भाषा नीति से जुड़े मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों पक्षों को आपसी संवाद के जरिए विवाद खत्म करने की सलाह दी।
2017 से चल रहा है नवोदय विद्यालय का विवाद
तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना का विवाद नया नहीं है। यह मामला मद्रास हाई कोर्ट के 2017 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया गया था। तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
जवाहर नवोदय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किए जाते हैं। तमिलनाडु में अब तक इन विद्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है।
अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को तीन महीने में जमीन चिन्हित करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
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