TMC Symbol Row: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘घास पर दो फूल’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए लागू होगी।
आयोग ने दोनों गुटों को तीन-तीन पसंदीदा पार्टी नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्न बताने का निर्देश दिया है। इसके लिए शुक्रवार सुबह 11 बजे तक विकल्प देने को कहा गया है। आयोग उपलब्ध विकल्पों में से प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।
The Election Commission of India has issued an interim order regarding the internal leadership dispute within the All India Trinamool Congress (AITC). Barring both rival factions—led by Mamata Banerjee and Arup Roy—from using the party name or the symbol, the ECI directed them to… pic.twitter.com/arCMw9qkUE
— IANS (@ians_india) September 17, 2026
6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। दोनों सीटों पर TMC के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउद्दीन शेख को चुनाव मैदान में उतारा है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
चुनाव आयोग के सामने TMC के संगठन, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों ने अपना-अपना दावा पेश किया है। आयोग के मुताबिक इस विवाद पर Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत फैसला करना होगा।

हालांकि, उपचुनाव के लिए समय कम होने के कारण आयोग ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू की है। आयोग का कहना है कि इससे दोनों गुटों को समान स्थिति में रखते हुए उनके अधिकारों और हितों की रक्षा की जा सकेगी। अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ना होगा।
दोनों गुटों को क्या करना होगा?
आयोग के निर्देश के मुताबिक, दोनों गुटों को तीन-तीन पसंदीदा पार्टी नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्न बताने होंगे। उन्हें इन विकल्पों को अपनी प्राथमिकता के क्रम में देना होगा। इसके बाद चुनाव आयोग उपलब्ध सूची में से प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।
TMC के पुराने नाम और सिंबल पर फिलहाल रोक
इस अंतरिम व्यवस्था के तहत ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘घास पर दो फूल’ वाला आरक्षित चुनाव चिह्न फिलहाल दोनों गुटों के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा। आयोग का यह आदेश आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला आयोग की आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा।

‘लोकतंत्र में तानाशाही की जगह नहीं’—ऋतब्रत बनर्जी
TMC के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “विमान से उतरने के तुरंत बाद हमें पता चला कि चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया है और पार्टी का नाम भी फ्रीज कर दिया गया है। हालांकि, एक बात स्पष्ट है कि लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है। चुनाव चिह्न और नाम को लेकर जो चर्चा चल रही थी, उस पर आज चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश ने साबित कर दिया है कि वंशवादी राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। कोई राजनीतिक पार्टी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं होती और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का कोई वारिस हो सकता है। आज यह बात साबित हो गई है।”
Kolkata, West Bengal: On TMC Party’s Symbol Row, State Assembly LoP Ritabrata Banerjee says, “…Just after getting off the plane, we found out that the symbol has been frozen, and the name has been frozen. However, one thing is clear: within a democracy, there is no place for… pic.twitter.com/zyaHpGAM4J
— IANS (@ians_india) September 17, 2026
TMC नेता कल्याण बनर्जी का ऋतब्रत पर पलटवार
TMC नेता कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, “जो व्यक्ति 2023 में पार्टी में शामिल हुआ हो, वह पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा नहीं कर सकता।”
VIDEO | Delhi: TMC leader Kalyan Banerjee takes a jibe at Ritabrata Banerjee after meeting Election Commission, says, “Someone who joined only in 2023 cannot claim the party symbol.” pic.twitter.com/apNsrTlMOM
— Press Trust of India (@PTI_News) September 17, 2026
नंदीग्राम पर सबकी नजर
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण विधानसभा सीट रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें शुभेंदु अधिकारी से हार मिली थी।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत दर्ज की। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिसके बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी। अब TMC के दोनों गुटों के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में होने और पार्टी के पारंपरिक नाम-सिंबल पर रोक के कारण यह उपचुनाव खास तौर पर चर्चा में है।
फिलहाल चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
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