US Iran Tension: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित निकालने के अपने ऑपरेशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को अचानक रोक दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात इस फैसले का ऐलान किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
2 दिन में सिर्फ 3 जहाज, मिशन पर सवाल
अमेरिका ने सोमवार सुबह यह ऑपरेशन शुरू किया था, लेकिन 48 घंटे के भीतर सिर्फ 3 जहाज ही सुरक्षित निकाले जा सके। जबकि होर्मुज स्ट्रेट से आमतौर पर हर दिन करीब 130 जहाज गुजरते हैं। ऐसे में ऑपरेशन की सीमित सफलता पर सवाल उठने लगे थे।
पाकिस्तान की अपील और ईरान से बातचीत
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ट्रम्प ने बताया कि Pakistan की ओर से ऑपरेशन रोकने की अपील की गई थी। साथ ही Iran के साथ समझौते को लेकर बातचीत में प्रगति भी इस फैसले की बड़ी वजह बनी।
ईरान का पलटवार और चेतावनी
ऑपरेशन शुरू होते ही ईरान ने कड़ा विरोध जताया था। उसने साफ कहा कि उसकी इजाजत के बिना कोई भी जहाज इस मार्ग से नहीं गुजर सकता। इसके बाद ईरान ने एक साउथ कोरियाई जहाज पर हमला किया और United Arab Emirates में मिसाइल स्ट्राइक भी की, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए।
ईरान ने बताया अपनी जीत
ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिका के इस कदम को अपनी रणनीतिक जीत करार दिया। उनका दावा है कि अमेरिका होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते को खुला रखने में नाकाम रहा और उसे पीछे हटना पड़ा।
पहले क्या बोला था अमेरिका?
फैसले से कुछ घंटे पहले ही मार्को रुबियो ने कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पूरी हो चुकी है और अब फोकस सिर्फ ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर है। लेकिन हालात तेजी से बदले और ऑपरेशन को रोकना पड़ा। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका का यह कदम सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव और क्षेत्रीय ताकतों के प्रभाव को भी दर्शाता है।
ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया, पाकिस्तान की अपील और सीमित सफलता इन तीनों ने मिलकर अमेरिका को बैकफुट पर ला खड़ा किया है। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह तनाव किसी समझौते में बदलेगा या फिर मध्य-पूर्व में टकराव और बढ़ेगा।






