Mojtaba Khamenei: ईरान ने रविवार को दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अनुसार यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा हाल ही में ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए दूसरे बड़े हमले के जवाब में की गई है।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इन हमलों में हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
खामेनेई का अमेरिका और इजराइल पर बड़ा हमला
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने हालिया सैन्य हमलों को लेकर जिस तरह सार्वजनिक बयान दिए और उन पर गर्व जताया, वह अपने आप में अपराध स्वीकार करने जैसा है।
खामेनेई ने कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर नागरिक और सैनिक की मौत तथा हर प्रकार के नुकसान का कानूनी हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान घरेलू अदालतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में भी कानूनी कार्रवाई करेगा।
The confessions and even brazen boasting of some of the leaders of the US-Zionist enemy regarding these crimes, are indisputably an admission of crime, and these effectively pave the way for the vindication of the [Iranian] nation’s rights that have been violated.
— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) June 28, 2026
ईरान का दावा- अमेरिका के 8 सैन्य ठिकाने निशाने पर
ईरानी सेना का कहना है कि उसके हमलों में कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिका के आठ सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया। इन ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपने सैन्य अभियानों के लिए करता है।
ईरान का कहना है कि उसका उद्देश्य अमेरिका को यह संदेश देना था कि यदि ईरान की संप्रभुता पर हमला हुआ तो उसका जवाब सीधे अमेरिकी हितों पर दिया जाएगा।
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फिलहाल हमले रोकने पर बनी सहमति
लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच राहत की खबर भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे पर नए सैन्य हमले नहीं करने पर सहमति जताई है।
दोनों देशों के अधिकारी मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में तकनीकी स्तर की वार्ता करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना होगा।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। पिछले कई दिनों से इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने के कारण तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित की तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप प्रशासन पर उठे सवाल
इस बीच अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य की डेमोक्रेटिक गवर्नर मिकी शेरिल ने ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि युद्ध का उद्देश्य लगातार बदलता रहा। पहले कहा गया कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करना है, फिर परमाणु कार्यक्रम रोकने की बात हुई और बाद में सत्ता परिवर्तन (रेजीम चेंज) की चर्चा शुरू हो गई।
शेरिल ने सवाल किया कि अब तक इनमें से कोई भी घोषित लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है, जबकि युद्ध की कीमत लगातार बढ़ती गई। उन्होंने ट्रम्प प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा कि इस पूरे अभियान से अमेरिका पहले की तुलना में कितना अधिक सुरक्षित हुआ है।
For nine years, I served in the United States Navy. For another six, I served on the House Armed Services Committee in Congress, overseeing America’s military and national security strategy. As both a veteran and a policymaker, I’m deeply troubled by Donald Trump’s handling of…
— Governor Mikie Sherrill (@GovSherrillNJ) June 28, 2026
अब नजर दोहा वार्ता पर
मंगलवार को दोहा में होने वाली तकनीकी वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने का रास्ता निकल सकता है। वहीं यदि वार्ता विफल रहती है तो अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर तेज होने की आशंका बनी रहेगी।
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