ममता बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा: बागी नेताओं को खुली चुनौती, कहा- हिम्मत है तो BJP में शामिल हो जाओ

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे सियासी घमासान के बीच पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार बागी नेताओं पर खुलकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “अगर मुझे रोकना है तो मुझे मारना पड़ेगा। मेरी आवाज कोई नहीं दबा सकता। मैं जनता के बीच तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न लेकर जाऊंगी।”

ममता ने बागी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे खुलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने वाले कई नेता अब पर्दे के पीछे नहीं बल्कि खुले तौर पर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं और यह विश्वासघात की पराकाष्ठा है।

गद्दारी की भी एक सीमा होती है”

ममता बनर्जी ने कहा कि जिन नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता और राजनीतिक पहचान बनाई, वही अब पार्टी के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें पहचान, सम्मान और जनाधार दिया, लेकिन आज वही लोग उसी संगठन के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा,

“गद्दारी की भी एक सीमा होती है। अगर भाजपा की राजनीति इतनी ही पसंद है तो छिपकर काम करने के बजाय खुलकर भाजपा में शामिल हो जाइए।”

तृणमूल भवन पर कब्जे का आरोप

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद से तृणमूल भवन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि भवन का किराया अक्टूबर 2027 तक जमा है और पार्टी हर महीने लगभग एक लाख रुपये किराया देती है। उन्होंने कहा,

“यह किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं बल्कि ‘मां, माटी, मानुष’ की संपत्ति है। इमारत पर कब्जा किया जा सकता है, लेकिन लोगों के दिलों पर नहीं।”

चुनाव प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वोटिंग, मतदाता सूची और मतगणना की प्रक्रिया को प्रभावित कर सत्ता हासिल की गई। उनके अनुसार केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद से मतगणना केंद्रों पर कब्जा किया गया और पूरी प्रक्रिया को हाईजैक किया गया।

हालांकि उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करते हुए उनकी पार्टी ने नई सरकार को स्वीकार किया है, लेकिन जनता के बीच जाकर वह एक बार फिर पार्टी को मजबूत करेंगी।

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TMC में कैसे शुरू हुई बगावत?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद 3 जून को तृणमूल कांग्रेस में पहली बड़ी बगावत सामने आई। पार्टी के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए और उन्होंने अलग गुट का गठन कर लिया। बागी विधायकों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर भी दावा किया।

इसके बाद 15 जून को टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने भी पार्टी छोड़ दी और त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी। इन घटनाओं ने तृणमूल कांग्रेस के सामने अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया।

ऋतब्रत बनर्जी बने बागी गुट के नेता

बागी विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपा। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें विपक्ष का नेता घोषित कर दिया। 22 जून को हुई बैठक में बागी गुट ने नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया।

चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा

सियासी संकट के बीच शनिवार को टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में उन्हें बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के साथ देखा गया, जिससे पार्टी के भीतर चल रही टूट की अटकलों को और बल मिला।

अब ममता के पास कितनी ताकत बची?

बगावत के बाद तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक ताकत में बड़ी कमी आई है। लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसद अलग हो चुके हैं, जिसके बाद ममता बनर्जी के पास केवल 8 लोकसभा सांसद बचे हैं। राज्यसभा में 13 में से 4 सांसदों के इस्तीफे के बाद अब पार्टी के पास 9 राज्यसभा सांसद हैं। वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं, लेकिन 58 विधायक बागी गुट में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के साथ अब सिर्फ 22 विधायक ही बचे हैं, जिससे पार्टी की संगठनात्मक और विधायी ताकत दोनों पर बड़ा असर पड़ा है।

आगे की चुनौती

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़े संकटों में से एक माना जा रहा है। एक ओर बड़ी संख्या में सांसद और विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि वह राजनीतिक लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं हैं। अब आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है और बागी गुट की आगे की रणनीति क्या रहती है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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