US Iran War Water Plant Attack: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब नए और खतरनाक दौर में पहुंच गया है। सैन्य ठिकानों के साथ-साथ अब दोनों देश आम नागरिकों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। ताजा हमलों में समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन (वाटर) प्लांट और जल भंडारण केंद्र भी हमलों की जद में आ गए हैं। इससे ईरान और खाड़ी क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने के साथ-साथ बड़े मानवीय संकट की आशंका भी बढ़ गई है।
अमेरिकी हमले में ईरान का वाटर प्लांट तबाह
ईरान ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिकी सेना ने होर्मोजगान प्रांत के बोंजी डिसैलिनेशन प्लांट पर हवाई हमला किया, जिससे करीब 20 गांवों के 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति ठप हो गई।
होर्मोजगान जल एवं अपशिष्ट जल कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने तस्नीम न्यूज एजेंसी को बताया कि अमेरिकी हमले के बाद 20 गांवों में रहने वाले करीब 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है और लोग पीने के पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।
US strike cuts off drinking water to 10,000 people in southeastern Iran
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Around 10,000 people in Iran’s Hormozgan province have been left without drinking water after a US strike hit a desalination plant in the coastal village of Bunji, a provincial official said on 18 July.… pic.twitter.com/QCjXGF9nOK— The Cradle (@TheCradleMedia) July 18, 2026
इसी बीच, होर्मोजगान जल एवं स्वच्छता प्राधिकरण ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के सीरिक जिले के बेमानी क्षेत्र में स्थित दो रणनीतिक जल भंडारण टैंकों पर भी हमला किया। इस हमले में दोनों टैंक पूरी तरह नष्ट हो गए, जिससे बेमानी जिले के सभी गांवों और कोहस्तक शहर की जलापूर्ति बंद हो गई। प्राधिकरण के अनुसार, हाल के दिनों में ईरान के जल ढांचे पर यह अमेरिका का चौथा हमला है।
BREAKING: The US has struck two strategic water tanks in the Bemani district of Sirik, southern Iran, completely destroying them and cutting off water distribution in all villages of the Bemani district and the city of Kohstak, per Iran’s Hormozgan Water and Sanitation Authority.…
— The Hormuz Letter (@HormuzLetter) July 18, 2026
कुवैत का आरोप- ईरान ने दूसरे दिन भी किया हमला
वहीं कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान ने लगातार दूसरे दिन उसके डिसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया। कुवैत की करीब 90 प्रतिशत पेयजल जरूरत समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाकर पूरी होती है। ऐसे में इन संयंत्रों पर हमला देश की जल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। कुवैती अधिकारियों ने कहा कि यदि डिसैलिनेशन प्लांट लंबे समय तक प्रभावित रहे तो देश में गंभीर पेयजल संकट पैदा हो सकता है।
Kuwait says Iran attacked a power and water desalination plant, causing widespread damage to the station.
The country relies heavily on desalination for drinking water, so any disruption poses a serious threat. https://t.co/ZUlffsQml0
— The Associated Press (@AP) July 17, 2026
कुवैत ने हमलों को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने तेल प्रतिष्ठानों, बिजलीघरों और डिसैलिनेशन प्लांट पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने कहा कि नागरिकों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। कुवैत ने ईरान को इन हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग की है।
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पाकिस्तान और कुवैत ने की संयम बरतने की अपील
होर्मोज स्ट्रेट के आसपास लगातार बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान और कुवैत ने अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने की अपील की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के बीच हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने पिछले महीने हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का सम्मान करने और हालात को और बिगड़ने से रोकने पर जोर दिया।
दोनों देशों ने कहा कि यदि संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जल्द राष्ट्र को संबोधित करेंगे मुजतबा खामेनेई
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का कार्यालय जल्द राष्ट्र के नाम संदेश जारी करेगा। उनके कार्यालय की ओर से कहा गया है कि यह संदेश केवल पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को दी गई ऐतिहासिक विदाई तक सीमित नहीं होगा, बल्कि देश की वर्तमान स्थिति, युद्ध और आगे की रणनीति पर भी नए सर्वोच्च नेता अपने विचार रखेंगे।
“सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक रूप से नहीं आएंगे मुजतबा”
राष्ट्र के नाम जारी अपने पहले लिखित संदेश में ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का अमेरिका ने बार-बार उल्लंघन किया, जिससे यह साबित हो गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और उनके वादों की कोई विश्वसनीयता नहीं है।
खामेनेई ने कहा कि अमेरिका ने कूटनीति छोड़कर युद्ध का रास्ता चुना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जबरदस्ती, वर्चस्ववाद और क्रूरता अमेरिकी नीति का हिस्सा हैं और आज अमेरिका ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वॉशिंगटन संघर्ष को और बढ़ाने की कोशिश करेगा तो ईरान और ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ ऐसा जवाब देंगे, जिसे अमेरिका कभी नहीं भूल पाएगा।
BREAKING: Iran’s Supreme Leader Mojtaba Khamenei in a new written message says the repeated US breaches of the Islamabad Memorandum of Understanding signed by Trump have laid bare “the signature of the US President is utterly worthless and devoid of credibility,” adding that the…
— The Hormuz Letter (@HormuzLetter) July 18, 2026
युद्ध खत्म होने तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से रहेंगे दूर
रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा कारणों से मुजतबा खामेनेई युद्ध समाप्त होने तक किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसी विदेशी नेता के साथ उनका पहला आधिकारिक संपर्क रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत या मुलाकात के रूप में हो सकता है।
अमेरिका के साथ समझौते से पीछे हटा ईरान
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने घोषणा की है कि तेहरान अब अमेरिका के साथ एक महीने पहले हुए समझौते की शर्तों का पालन नहीं करेगा। उनका कहना है कि अमेरिका ने पहले समझौते का उल्लंघन किया, इसलिए ईरान भी अब उस समझौते को प्रभावी नहीं मानता।
यह समझौता कई सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद हुआ था और इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जगी थी। हालांकि हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच फिर से तेज हुए हमलों ने इस समझौते को लगभग निष्प्रभावी बना दिया है।
इसी बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शनिवार को जानकारी दी कि 17 जुलाई को जॉर्डन में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान दो अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि एक सैनिक अब भी लापता है। सेंटकॉम के अनुसार, हमले में घायल हुए चार अन्य अमेरिकी सैनिकों को इलाज के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिन्हें उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। वहीं, मामूली रूप से घायल अन्य सैनिक दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं। सेंटकॉम ने कहा कि शहीद सैनिकों के परिजनों को आधिकारिक सूचना दिए जाने तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
CENTCOM Statement on Recently Fallen, Missing U.S. Service Members
TAMPA, Fla. — On July 17, two U.S. service members in Jordan were killed in action as U.S. Central Command (CENTCOM) and partner forces defended against Iranian ballistic missile and drone attacks. Additionally,…
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 18, 2026
बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध में जल आपूर्ति, बिजलीघर और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाया जाता रहा तो इसका असर केवल ईरान और कुवैत तक सीमित नहीं रहेगा। पूरे खाड़ी क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा सकता है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा तथा समुद्री व्यापार भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
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