US Senate Russia Oil Tariff Bill: अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान वाले बिल को 86-11 के भारी बहुमत से पास कर दिया। बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के सांसदों का समर्थन मिला है। भारत और चीन समेत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर इसका असर पड़ सकता है।
हालांकि, अभी भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद बिल अब अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा। वहां से पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही यह कानून बन सकेगा।
STORY | US Senate passes Russia sanctions bill that seeks 100% tariffs on India, four others
The US Senate voted overwhelmingly to approve a bill to punish Russia and key buyers of its petroleum products, such as China and India, claiming that such trade helps fuel the Ukraine… pic.twitter.com/k0IefCmnh3
— Press Trust of India (@PTI_News) August 8, 2026
भारत पर क्यों पड़ सकता है असर?
भारत रूस से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है। रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। जून 2026 में भारत ने रूस से करीब 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो भारत के कुल तेल आयात का लगभग 52.4% था।
मई की तुलना में जून में रूस से भारत के कच्चे तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी हुई। यानी जून में भारत द्वारा आयात किए गए हर दो बैरल कच्चे तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया।
यही वजह है कि अमेरिका के इस प्रस्ताव का भारत पर खास असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
शुरुआत में 500% टैरिफ का था प्रस्ताव
रूस पर दबाव बढ़ाने वाले इस प्रस्ताव को लेकर शुरुआती मसौदे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों के सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। बाद में प्रस्तावित टैरिफ को घटाकर 100% तक किया गया।
बिल का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए उसके वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाया जा सके।
राष्ट्रपति को मिल सकती है बड़ी शक्ति
बिल कानून बनने पर अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से जुड़े देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई करने की व्यापक शक्ति मिल सकती है। इसके तहत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।
इसके अलावा रूस के ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों, रक्षा उद्योग, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से जुड़े लोगों पर प्रतिबंधों को और मजबूत करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
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ईरान पर भी बढ़ेगा दबाव
बिल में ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर भी प्रावधान शामिल हैं। इसके तहत ईरान के साथ कारोबार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ सकता है।
ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने का प्रावधान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के दौरान तेल आपूर्ति को लेकर अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ी थी।
यूरोपीय देशों को मिल सकती है राहत
बिल में रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ यूरोपीय देशों के लिए राहत का प्रावधान भी रखा गया है। ऐसे देशों को छूट मिल सकती है जो रूसी गैस पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं और रूस के कुल गैस निर्यात का सीमित हिस्सा ही खरीदते हैं।
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य यूरोपीय सहयोगियों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि रूस के ऊर्जा कारोबार को महत्वपूर्ण आर्थिक समर्थन देने वाले देशों पर दबाव बढ़ाना है।
भारत के लिए क्या होगा असर?
अगर यह बिल अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पास होकर कानून बनता है और राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो सकता है। इससे भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है।
वहीं, भारत के सामने रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल और अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात के बीच संतुलन बनाने की चुनौती हो सकती है। भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद का फैसला राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाता है।
अभी टैरिफ लागू नहीं हुआ
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सीनेट में बिल पास होना और टैरिफ लागू होना दो अलग-अलग चरण हैं। अभी केवल सीनेट ने इसे मंजूरी दी है। आगे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस पर मतदान होगा। वहां मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर जरूरी होंगे।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100% टैरिफ लग चुका है। भारत पर संभावित टैरिफ का फैसला अमेरिकी कानून बनने और उसके बाद राष्ट्रपति की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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