Donald Trump on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि भारत ने कई दशकों तक अमेरिका पर ऊंचे टैरिफ लगाकर उसका फायदा उठाया, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और अमेरिका को भारत के साथ व्यापार से अच्छा लाभ मिल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच जल्द ही व्यापार समझौता हो सकता है, क्योंकि उनके और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंध हैं।
ट्रंप ने कहा कि भारत लंबे समय तक उन देशों में शामिल रहा जिसने अमेरिकी उत्पादों पर अपेक्षाकृत अधिक आयात शुल्क लगाया। उनका दावा है कि इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ और भारत को व्यापारिक लाभ मिला। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में अमेरिका अपनी व्यापारिक नीतियों और टैरिफ व्यवस्था के जरिए बेहतर स्थिति में है तथा भारत के साथ व्यापार से अधिक राजस्व प्राप्त कर रहा है।
मोदी से दोस्ती का किया जिक्र
अपने बयान में ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मोदी उनके अच्छे मित्र हैं और दोनों नेताओं के बीच मजबूत समझ और संवाद है। ट्रंप ने कहा कि इसी वजह से उन्हें विश्वास है कि दोनों देश व्यापारिक मतभेदों के बावजूद किसी न किसी समझौते तक पहुंच जाएंगे।
#WATCH | President Donald Trump says, “For years, India took advantage of the United States… They charged us tremendous tariffs and paid nothing… Now it is the exact reverse and we are making a lot of money with India. But we will get to a deal because I like your Prime… pic.twitter.com/IR2x2MqUV5
— ANI (@ANI) June 4, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों की ओर भी संकेत करता है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग के कारण दोनों देशों की साझेदारी मजबूत हुई है।
नई दिल्ली में हुई हालिया व्यापार वार्ता
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और भारत सरकार के अधिकारियों के बीच नई दिल्ली में कई दौर की व्यापार वार्ता हुई है। दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं ताकि लंबे समय से लंबित व्यापारिक मुद्दों का समाधान किया जा सके।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार बातचीत सकारात्मक रही है और दोनों पक्ष ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं जिससे दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिल सके। हालांकि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है।
भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का खतरा
व्यापार वार्ता के बीच अमेरिका की ओर से कुछ देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। प्रस्तावित सूची में भारत का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो अमेरिका में जाने वाले कुछ भारतीय उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में भारतीय वस्तुएं अमेरिकी बाजार में महंगी हो सकती हैं, जिससे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि इस विषय पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और अमेरिका विभिन्न पक्षों की राय लेने के बाद ही आगे बढ़ेगा।
फरवरी 2026 में तैयार हुआ था समझौते का खाका
भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनाई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे व्यापारिक विवादों को कम करना और व्यापक व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करना था।
लेकिन बाद में अमेरिका में टैरिफ संबंधी कानूनी और राजनीतिक विवादों के कारण प्रक्रिया धीमी पड़ गई। इसके चलते अंतरिम समझौता अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सका है। अब दोनों देशों के अधिकारी फिर से बातचीत को गति देने में जुटे हैं।
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किन मुद्दों पर अटकी है भारत-अमेरिका ट्रेड डील?
भारत चाहता है कि अमेरिका भारतीय वस्त्र उद्योग, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पादों, दवाइयों और कृषि उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को कम करे। दूसरी ओर अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों, डेयरी सामान, शराब, मेडिकल उपकरणों और डिजिटल कंपनियों के लिए अधिक खोल दे।
सबसे बड़ा विवाद कृषि क्षेत्र को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि उसके मक्का, सोयाबीन, बादाम, सेब और अन्य कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच मिले। वहीं भारत को आशंका है कि ऐसा होने पर देश के करोड़ों किसानों की आय और बाजार हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
डेयरी सेक्टर भी बना बड़ी बाधा
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में डेयरी क्षेत्र भी प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है। अमेरिका भारतीय बाजार में अपने डेयरी उत्पादों की पहुंच बढ़ाना चाहता है, जबकि भारत खाद्य मानकों, सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं और घरेलू डेयरी उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाए हुए है।
क्या आगे बढ़ पाएगी ट्रेड डील?
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेद जरूर हैं, लेकिन रणनीतिक और आर्थिक हित इतने मजबूत हैं कि किसी न किसी स्तर पर समझौते की संभावना बनी हुई है। ट्रंप का मोदी के साथ व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों पक्ष बातचीत जारी रखेंगे और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
भारत और अमेरिका के बीच होने वाला संभावित व्यापार समझौता न केवल दोनों देशों के व्यापार को नई दिशा दे सकता है, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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