Hormuz Strait: होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह ब्लॉक नहीं है, लेकिन ईरान-इजरायल-यूनाइटेड स्टेट्स तनाव के कारण यह रूट रिस्की जरूर हो गया है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
ऐसे में UAE की 380 किमी लंबी हबशान-फुजैराह पाइपलाइन अहम बनती है
- क्षमता: 1.5–1.8 मिलियन बैरल/दिन
- यह सीधे Gulf of Oman में खुलती है
- यानी Hormuz को बायपास किया जा सकता है
- इस पाइपलाइन से तेल Fujairah पोर्ट पहुंचता है, जहां से टैंकर सीधे अरब सागर के रास्ते भारत आ सकते हैं।
भारत को मिलेगा फायदा
UAE पहले OPEC नियमों से बंधा हुआ है, इसलिए सप्लाई पूरी तरह उसकी मर्जी से नहीं बढ़ाई जा सकती। लेकिन अगर भविष्य में उत्पादन बढ़ता है, तो भारत को अतिरिक्त तेल मिल सकता है।
अप्रैल 2026 में UAE ने भारत को लगभग 6,19,000 बैरल/दिन कच्चा तेल भेजा, जो पिछले साल के 4,33,000 बैरल/दिन से ज्यादा है।
भारत के लिए 3 बड़े पॉइंट
1. सप्लाई बढ़ने की संभावना (लॉन्ग टर्म)
अगर UAE प्रोडक्शन 5 मिलियन बैरल/दिन तक बढ़ाता है, तो ग्लोबल सप्लाई बढ़ेगी और भारत को फायदा मिल सकता है।
2. शॉर्ट टर्म लिमिट
अभी हार्मुज पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन रिस्क बना हुआ है। फुजैराह पाइपलाइन की क्षमता 1.5–1.8 मिलियन बैरल/दिन है, इसलिए पूरी सप्लाई तुरंत शिफ्ट नहीं हो सकती।
3. जियोपॉलिटिक्स
सऊदी अरबिया और UAE के बीच मतभेद की खबरें समय-समय पर आती रही हैं। अगर OPEC में एकजुटता कमजोर होती है, तो प्राइस वॉर का खतरा भी बढ़ सकता है।
तेल की कीमत और भारत पर असर
पिछले 10 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है और कीमतें करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची हैं। साथ ही रुपये की कमजोरी से आयात और महंगा हो गया है।
इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत, महंगाई और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट पर पड़ सकता है।






