ट्रंप के गाजा प्लान को नेतन्याहू ने ठुकराया, बोले- ‘जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा’

Netanyahu Rejects Trump’s Gaza Plan: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा को लेकर प्रस्तावित प्लान को खारिज कर दिया। नेतन्याहू ने साफ कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा। उन्होंने गाजा से इजराइली सेना हटाने से भी इनकार किया और कहा कि इजराइल हमास को सिर्फ कमजोर नहीं, बल्कि पूरी तरह खत्म करना चाहता है।

नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि इजराइल ने ट्रंप के Board of Peace के 15-पॉइंट प्लान को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि इजराइल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है और अमेरिकी प्रशासन को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है।

नेतन्याहू के मुताबिक, इजराइली सेना तब तक गाजा से वापस नहीं आएगी, जब तक हमास को पूरी तरह निहत्था नहीं कर दिया जाता। उनका कहना है कि हमास के पास अभी भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता मौजूद है।

ट्रंप ने कहा था- इजराइल समझौते से खुश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 जुलाई को दावा किया था कि गाजा में हमास और इजराइल के बीच एक बड़े समझौते की दिशा में प्रगति हुई है। प्रस्ताव के तहत जैसे-जैसे हमास अपने हथियार छोड़ता जाएगा, वैसे-वैसे इजराइली सेना गाजा से पीछे हटेगी।

ट्रंप ने वॉशिंगटन में नेतन्याहू से मुलाकात के बाद कहा था कि इजराइल इस समझौते से काफी खुश है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना था कि योजना को जमीन पर लागू करना आसान नहीं होगा।

लेकिन अब नेतन्याहू के बयान से साफ हो गया है कि ट्रंप प्रशासन और इजराइल के बीच इस योजना को लेकर पूरी सहमति नहीं बनी है।

नेतन्याहू ने क्यों किया विरोध?

गाजा से इजराइली सेना की वापसी और हमास के भविष्य को लेकर दोनों पक्षों की शर्तें अलग हैं। इजराइल चाहता है कि हमास पहले पूरी तरह हथियार डाल दे और उसकी सैन्य क्षमता खत्म हो। इसके बाद ही सेना की वापसी पर विचार किया जाए।

नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका की ओर से कुछ सुझाव इजराइल को स्वीकार हैं, लेकिन कुछ प्रस्तावों पर वह सहमत नहीं है।

इजराइल में भी गाजा को लेकर दबाव

नेतन्याहू पर घरेलू राजनीति का भी दबाव है। इजराइल में दक्षिणपंथी नेता लगातार गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी रखने की मांग करते रहे हैं। सरकार के कई मंत्री गाजा से सेना हटाने के खिलाफ हैं और वहां यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत भी कर चुके हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने पहले ट्रंप के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा था कि अगर हमास के लड़ाकों के खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई तो उन्हें भविष्य में दोबारा हमला करने का मौका मिल सकता है।

ऐसे में नेतन्याहू के लिए ट्रंप के प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार करना राजनीतिक तौर पर भी मुश्किल माना जा रहा है।

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फिलिस्तीन को लेकर भी नेतन्याहू का दो टूक रुख

गाजा युद्ध के बाद फिलिस्तीनी राज्य के गठन का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिका और कई दूसरे देश दो-राष्ट्र समाधान की बात करते रहे हैं, लेकिन नेतन्याहू लंबे समय से फिलिस्तीनी राज्य के गठन का विरोध करते आए हैं।

रविवार को उन्होंने इस मुद्दे पर अपना रुख और स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक वह इजराइल के प्रधानमंत्री हैं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा।

ट्रंप का Board of Peace क्या है?

ट्रंप ने सितंबर 2025 में गाजा युद्ध को खत्म करने की योजना पेश करते हुए Board of Peace बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस पहल का उद्देश्य युद्ध के बाद गाजा में सुरक्षा, पुनर्निर्माण और प्रशासन से जुड़ी व्यवस्था तैयार करना बताया गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया था। इसका दायरा केवल गाजा तक सीमित रखने के बजाय दुनिया के दूसरे संघर्षों में भी शांति स्थापित करने तक बढ़ाने की बात कही गई है।

बोर्ड के चार्टर के मुताबिक, जो देश तीन साल से अधिक समय तक इसका सदस्य बने रहना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।

अब आगे क्या?

नेतन्याहू के ताजा बयान के बाद ट्रंप के गाजा प्लान के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिका जहां युद्ध खत्म करने और गाजा के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर रहा है, वहीं इजराइल हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

अब बातचीत का सबसे अहम मुद्दा यही होगा कि हमास के हथियारों का क्या होगा, इजराइली सेना कब गाजा से हटेगी और युद्ध के बाद फिलिस्तीन के भविष्य को लेकर क्या व्यवस्था बनेगी।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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