Balen Shah: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विदेशी राजनयिकों के साथ मुलाकात को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से वन-टू-वन मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम के साथ अलग से बैठक करेंगे।
प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन शाह किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले शाह विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे थे। उनकी इस नीति को नेपाल की संतुलित विदेश नीति के तौर पर देखा जाता था।
पहले भारत के राजदूत से होगी मुलाकात
सोमवार को शाह की पहली बैठक भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ होगी। इसके बाद चीनी राजदूत झांग माओमिंग से उनकी मुलाकात होगी। माना जा रहा है कि दोनों बैठकों में नेपाल के भारत और चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और मौजूदा मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
भारत और चीन दोनों ही नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं। ऐसे में एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठक को खास कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मंगलवार को अमेरिका के अधिकारी से वन-टू-वन बैठक
मंगलवार को बालेन शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से मुलाकात करेंगे। यह बैठक भी वन-टू-वन होगी। इससे संकेत मिलता है कि शाह अब विदेशी प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद को लेकर पहले की अपनी नीति में बदलाव कर रहे हैं।
हिंसा के बाद टाल दी गई थीं बैठकें
इन राजनयिकों के साथ शाह की बैठकें करीब दो सप्ताह पहले ही तय थीं, लेकिन सुनसरी और अन्य जिलों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद इन्हें टाल दिया गया था। अब सरकार ने दोबारा बैठकों का कार्यक्रम तय किया है।
प्रधानमंत्री के एक सलाहकार के मुताबिक, संबंधित दूतावासों को बैठकों के समय की जानकारी दे दी गई है।
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पहले वन-टू-वन मुलाकातों से बचते थे शाह
प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में बालेन शाह ने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों के साथ अकेले मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। इसी वजह से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11-12 मई की नेपाल यात्रा भी प्रभावित हुई थी। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, शाह का मिस्री के साथ अकेले में बैठक करने से इनकार भी यात्रा टलने की वजहों में शामिल था।
शाह ने कुछ अमेरिकी अधिकारियों के साथ मुलाकात के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय उन्होंने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं।
अब क्यों बदली रणनीति?
शाह की सामूहिक बैठकों की नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति विशेषज्ञों ने संतुलित कदम बताया था। उनका मानना था कि इससे किसी एक देश को ज्यादा महत्व देने का संदेश नहीं जाता और नेपाल सभी देशों के साथ समान व्यवहार का संकेत देता है।
हालांकि, सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद शाह के सलाहकारों ने उन्हें घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने मधेशी राजनीतिक दलों और सांसदों के साथ-साथ कारोबारियों, उद्योगपतियों, ठेकेदारों और निर्यातकों से भी अलग-अलग मुलाकातें शुरू कीं।
भारत-चीन-अमेरिका के बीच संतुलन पर जोर
अब विदेशी राजदूतों के साथ वन-टू-वन बैठकें भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं। भारत और चीन नेपाल के दो सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं, जबकि अमेरिका भी नेपाल का महत्वपूर्ण विकास और रणनीतिक साझेदार है।
ऐसे में शाह का भारत, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नेपाल अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखते हुए तीनों देशों के साथ सीधे संवाद बढ़ाना चाहता है।
भारत से शुरुआत, चीन के साथ बातचीत और फिर अमेरिका के प्रतिनिधि से मुलाकात बालेन शाह की यह नई कूटनीतिक रणनीति आने वाले दिनों में नेपाल की विदेश नीति की दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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