CBG Gobar Dhan Programme: मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव के कारण एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने और इम्पोर्टेड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए 2.5 अरब डॉलर की एक नई पहल का ऐलान किया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से सप्लाई में रुकावट आई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी LNG का 50-60% हिस्सा इम्पोर्ट करता है। कतर भारत का मुख्य LNG सप्लायर हुआ करता था और ज्यादातर शिपमेंट इसी जलडमरूमध्य से होकर आते थे। टकराव शुरू होने से पहले दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा एनर्जी कार्गो इसी रास्ते से होकर गुजरता था।
भारत सरकार की 2.5 अरब डॉलर की कंप्रेस्ड बायोगैस ‘गोबर धन’ कार्ययोजना को इस दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। गोबर धन कार्यक्रम के जरिए देश में बने ईंधन से ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने और लिक्विफाइड नेचुरल गैस पर निर्भरता कम करने की परिकल्पना की गई है।
CBG प्रोडक्शन को 10 गुना बढ़ाने के लिए 10 साल की ‘नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम’ को मंजूरी दी गई है। इसका मकसद दक्षिण एशियाई देश की एनर्जी सप्लाई से जुड़ी कमजोरियों को कुछ हद तक दूर करना है।
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CBG, जिसे बायो-CNG भी कहा जाता है, मीथेन से भरपूर एक ईंधन है। यह मवेशियों के गोबर, फसल के अवशेष, खाने की बर्बादी, सीवेज और नगरपालिका के जैविक कचरे से बनाया जाता है। उद्योगों, वाहनों और घरों में पाइप से गैस पहुंचाने वाले नेटवर्क में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की जगह लेने से पहले इसे शुद्ध करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। बचे हुए कचरे का इस्तेमाल खाद के तौर पर किया जा सकता है।
CNG और LNG असल में एक ही चीज नहीं हैं। दोनों में मुख्य रूप से मीथेन होता है, लेकिन CNG को दबाव के जरिए संपीड़ित किया जाता है, जबकि LNG को बेहद कम तापमान पर तरल रूप में बदला जाता है। LNG का इस्तेमाल लंबी दूरी की शिपिंग के लिए किया जाता है।
भारत पहले से ही अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार करके उसमें लिक्विफाइड गैस को शामिल करने की योजना बना रहा है। भारत में पेट्रोल और डीजल में इथेनॉल मिलाने का भी ऐसा ही एक कार्यक्रम है, ताकि इम्पोर्ट पर निर्भरता कम की जा सके।
नई दिल्ली का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2027 से वित्तीय वर्ष 2036 तक एक दशक में LNG इम्पोर्ट कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है। इस प्रोग्राम से करीब 8 अरब डॉलर की लोकल बायोगैस इंडस्ट्री बनने की भी उम्मीद है।
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