Sugar Prices Rise: देश के कई शहरों में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़कर ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। पिछले तीन महीनों में चीनी के दाम करीब 40% यानी ₹19 प्रति किलो तक बढ़ने की बात सामने आई है। बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर यह कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां घरेलू बाजार में चीनी महंगी हो रही है और सरकार को विदेश से चीनी आयात करने की जरूरत पड़ रही है।
खड़गे ने चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर सरकार से कई सवाल किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ गन्ने का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल बनाने में किया जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ देश में चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और आयात की नौबत आ गई है।
त्योहारों से पहले चीनी की मिठास में मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट घुल गई है।
मोदी सरकार से 3 सीधे सवाल:
1. दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में आज चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों है? नौबत निर्यात रोकने और 10 लाख टन चीनी duty-free आयात करने तक कैसे… pic.twitter.com/hO9wLYgVWN
— Mallikarjun Kharge (@kharge) August 22, 2026
सरकार ने एथेनॉल को जिम्मेदार मानने से किया इनकार
हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, कीमतों में तेजी के पीछे कई दूसरे कारण हैं। इनमें घरेलू चीनी उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, खराब मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव शामिल है।
सरकार के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो थी, जो बढ़कर ₹56 प्रति किलो हो गई। वहीं, एक्स-मिल कीमत भी महज 7-10 दिनों में ₹47-48 से बढ़कर करीब ₹62 प्रति किलो पहुंच गई।
10 लाख टन रॉ शुगर आयात को मंजूरी
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना आयात शुल्क के मंगाने की मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
भारत ने इससे पहले 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी का आयात किया था। करीब नौ साल बाद एक बार फिर घरेलू सप्लाई को बनाए रखने के लिए विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है।
चीनी का स्टॉक क्यों घटा?
चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे कम उत्पादन और घटते स्टॉक को प्रमुख वजह माना जा रहा है। पिछले साल ज्यादा बारिश और फसल में बीमारी के कारण गन्ने को नुकसान पहुंचा। इससे गन्ने से चीनी बनने की रिकवरी रेट 12% से नीचे चली गई।
2025-26 में देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था। रेड रॉट, टॉप बोरर और ज्यादा बारिश जैसी वजहों से उत्पादन प्रभावित हुआ।
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एथेनॉल के लिए गन्ने का इस्तेमाल भी मुद्दा
चीनी की कीमतों को लेकर एथेनॉल नीति पर भी बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल देश में करीब 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसमें अनाज के अलावा चीनी बनाने योग्य गन्ने और शीरे का भी इस्तेमाल किया गया।
हालांकि, खाद्य सचिव का कहना है कि अब एथेनॉल उत्पादन में शुगर की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले कम हुई है। सरकार के अनुसार, एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% से घटकर 2025-26 में करीब 9% रह गई है।
निर्यात से भी स्टॉक पर पड़ा दबाव
सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। इसके बाद फरवरी 2026 में 5 लाख टन अतिरिक्त निर्यात की अनुमति दी गई। मई 2026 में कीमतें बढ़ने के बाद निर्यात पर रोक लगा दी गई, लेकिन तब तक करीब 8 लाख टन चीनी देश से बाहर जा चुकी थी।
इससे घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा। मिलों के पास पेराई सीजन शुरू होने से पहले चीनी का शुरुआती स्टॉक भी पिछले साल के करीब 47 लाख टन से घटकर इस बार लगभग 32 लाख टन रह गया।
त्योहारों में बढ़ सकती है मांग
अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण मिठाई, पेय पदार्थ और कन्फेक्शनरी उद्योग में चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कम स्टॉक के बीच मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका है।
सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है। डीलर्स के लिए 400 टन की सीमा तय की गई है, जबकि 1 सितंबर से बड़े थोक खरीदार 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक नहीं कर सकेंगे।
अक्टूबर से बढ़ सकती है सप्लाई
सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी मिलों में नया पेराई सीजन 15 अक्टूबर के आसपास शुरू हो सकता है। इससे अक्टूबर में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है।
सरकार का दावा है कि नई पेराई शुरू होने के बाद घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ेगी और त्योहारों के दौरान कमी नहीं होगी। सितंबर 2026 के अंत तक देश में 33-35 लाख टन चीनी का स्टॉक रहने का अनुमान भी सरकार ने जताया है।
फिलहाल चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी बहस तेज हो गई है। खड़गे जहां एथेनॉल नीति और विदेश से चीनी आयात को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि कीमतों में तेजी का मुख्य कारण एथेनॉल नहीं बल्कि कम उत्पादन, मौसम का असर और त्योहारों से पहले बढ़ी मांग है।
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