Xi Jinping India Visit: नई दिल्ली में होने वाली BRICS समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी रहेगी। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को शी जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि कर दी है। इससे दो दिन पहले रूस ने भी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की पुष्टि की थी। दोनों नेताओं के दौरे को भारत के लिए अहम माना जा रहा है।
शी जिनपिंग का यह 2020 में हुई गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत का पहला दौरा होगा। ऐसे में BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय बैठक पर भी नजर रहेगी।
गलवान झड़प के बाद बिगड़े भारत-चीन के रिश्ते
15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की थी।
गलवान की घटना के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव काफी बढ़ गया था। सीमा पर सैन्य गतिरोध के साथ-साथ दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों पर भी इसका असर पड़ा।
हालांकि, इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आमने-सामने आए हैं। पिछले साल चीन में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
अब नई दिल्ली में होने वाली BRICS समिट के दौरान दोनों नेताओं के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है।
भारत-चीन के बीच सीमा और व्यापार अहम मुद्दे
भारत और चीन के अधिकारी पिछले कई महीनों से दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी 24 अगस्त को चीन गए थे।
भारत और चीन के बीच बातचीत में सीमा विवाद के अलावा व्यापार और आर्थिक संबंध भी अहम मुद्दे हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
इसके साथ ही रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
भारत-चीन संबंधों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं: संजय भट्टाचार्य
पूर्व BRICS शेरपा और भारतीय राजनयिक संजय भट्टाचार्य ने कहा कि बहुपक्षीय बैठकों के दौरान भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय बातचीत के अवसर भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश महान सभ्यतागत शक्तियां होने के साथ-साथ उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं।
संजय भट्टाचार्य ने कहा, “यह सही है कि चीन ने अभी तक शी जिनपिंग की मौजूदगी की औपचारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन बहुपक्षीय बैठकों के ऐसे अवसर द्विपक्षीय बातचीत के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं। भारत और चीन दो महान सभ्यतागत शक्तियां हैं। आज दोनों उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं और वैश्विक शक्तियां हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत और चीन के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग की उम्मीद है। आर्थिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देशों के लिए साथ मिलकर काम करने के काफी अवसर मौजूद हैं।
“आर्थिक क्षेत्र में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा जरूर रहेगी, लेकिन सहयोग की भी काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि दोनों पक्षों के लिए मिलकर काम करने के अवसर बहुत व्यापक हैं,”
#WATCH | Delhi: Former BRICS Sherpa & Indian diplomat, Sanjay Bhattacharyya says, “… It is true that the Chinese have not formally confirmed the presence of Xi Jinping, but these occasions where we have multilateral gatherings are also opportunities for bilateral interaction.… pic.twitter.com/zx8j9Qy2q8
— ANI (@ANI) September 10, 2026
12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट
BRICS समिट का आयोजन नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होगा। इसमें चीन और रूस समेत 11 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे।
इस साल BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।
भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर है।
भारत के लिए अहम होगा जिनपिंग-पुतिन का दौरा
BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी ऐसे समय में हो रही है, जब भारत प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने पर जोर दे रहा है।
एक तरफ भारत और चीन के बीच सीमा और व्यापार से जुड़े मुद्दे हैं, वहीं रूस भारत का लंबे समय से प्रमुख रणनीतिक साझेदार रहा है। ऐसे में BRICS के मंच पर मोदी, जिनपिंग और पुतिन की मौजूदगी वैश्विक राजनीति और भारत की कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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