Jaishankar UN Speech on Terrorism: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी। अगर सीमा पार कोई सरकार आतंकवाद में शामिल होती है, तो उसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ नहीं चल सकते। आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा।
आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं
जयशंकर ने कहा “कल आतंकवाद के एक लगातार समर्थक ने इस महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ-साथ नहीं चल सकते। आतंकवाद के आधार पर बनी किसी भी समझ पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले को अपना रवैया सुधारना होगा।”
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करता रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद के आधार पर बनी किसी भी समझ की समीक्षा स्वाभाविक रूप से होगी।
VIDEO | New York: EAM S Jaishankar at the United Nations General Assembly says, “Yesterday, a serial practitioner of terrorism misrepresented facts before this Assembly. Arguments were invoked to normalise terrorism and claim immunity from its consequences. That will not stand.… pic.twitter.com/VSyzoMaxId
— Press Trust of India (@PTI_News) September 26, 2026
आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं
जयशंकर ने कहा कि एक दिन पहले आतंकवाद के समर्थक देश से जुड़े एक व्यक्ति ने महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के आधार पर बनी किसी भी समझ की समीक्षा स्वाभाविक रूप से होगी। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने अधिकारों का इस्तेमाल करता रहेगा।
संघर्ष और टकराव दुनिया के लिए बड़ी चिंता
जयशंकर ने कहा कि संघर्ष और टकराव दुनिया के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं। शांति बनाए रखने में असमर्थता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। इसका असर पूरी दुनिया में देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत स्थिति को सुधारने के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है, खासकर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में। शांति का मतलब केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है।
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समुद्र में जहाजों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं
विदेश मंत्री ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों और समुद्री यात्रियों को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना कर रही है। ऐसे हालात में शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
एक दिन पहले पाकिस्तानी पत्रकार से हुआ था सामना
इससे पहले शुक्रवार को एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने को लेकर सवाल किया था। जयशंकर ने जवाब देते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट किया।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता रहा है।
भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
समुद्री हमलों में भारतीय नाविकों की मौत
हाल के महीनों में अलग-अलग समुद्री हमलों में भारतीय नाविकों के मारे जाने और लापता होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इनमें 8 जुलाई को ब्लैक सी में MV ओमोर्फी, 19 जुलाई को MV गोल्डन लियो, 9 सितंबर को होर्मुज स्ट्रेट में एल गैया टैंकर और 17 सितंबर को ओमान की खाड़ी में MV केप डाओ से जुड़ी घटनाएं शामिल हैं।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर जहाजों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
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