Himachal Salary Cut News: हिमाचल प्रदेश में गहराते आर्थिक संकट के बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhvinder Singh Sukhu Government) सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राज्य की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने खुद अपनी सैलरी में 50 प्रतिशत कटौती का ऐलान किया है। इसके साथ ही मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायपालिका के कुछ वर्गों के वेतन में भी अस्थायी कटौती (डिफर) लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने बजट के दौरान कहा कि यह फैसला राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम उन्होंने खुद से शुरू किया है, ताकि सरकार का हर स्तर इस संकट से निपटने में भागीदारी निभाए।
किन-किन पर पड़ी सैलरी कट की मार?
सरकार के फैसले के मुताबिक मुख्यमंत्री का 50 प्रतिशत वेतन, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों का 30% वेतन तथा विधायकों का 20 प्रतिशत वेतन अगले छह महीनों के लिए डिफर किया जाएगा। यानी इन जनप्रतिनिधियों को फिलहाल पूरा वेतन नहीं मिलेगा।
प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रिंसिपल सेक्रेटरी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा रोका गया है, जबकि सचिव और विभागाध्यक्षों के वेतन में 20 प्रतिशत कटौती की गई है।
पुलिस विभाग में भी यह असर साफ दिखेगा। डीजीपी और एडीजीपी स्तर के अधिकारियों का 30 प्रतिशत वेतन डिफर किया गया है, जबकि आईजी, डीआईजी और एसपी स्तर तक के अधिकारियों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा रोका गया है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की गई है।
किन्हें मिली राहत?
सरकार ने ग्रुप C और ग्रुप D कर्मचारियों को इस फैसले से पूरी तरह बाहर रखा है। इन कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलता रहेगा। वहीं ग्रुप A और ग्रुप B अधिकारियों के वेतन का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा डिफर किया गया है, जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
न्यायपालिका पर क्या असर?
सरकार ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए उम्मीद जताई है कि जिला और अतिरिक्त जिला जजों के स्तर पर 20 प्रतिशत वेतन डिफर किया जाएगा। हालांकि हाई कोर्ट के जज इस पर अपने विवेक से फैसला लेंगे।
क्यों आई ये स्थिति?
मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार राज्य पर वेतन और पेंशन से जुड़ी देनदारियां बढ़कर करीब 13,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई हैं। इसके अलावा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने से हिमाचल की वित्तीय स्थिति और ज्यादा दबाव में आ गई है। उन्होंने पिछली सरकारों के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए।
क्या यह फैसला स्थायी है?
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह कटौती स्थायी नहीं है। यह केवल अगले छह महीनों के लिए अस्थायी व्यवस्था है। जैसे ही राज्य की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, डिफर किया गया पूरा वेतन संबंधित लोगों को वापस कर दिया जाएगा।
कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत
सरकार ने यह भी ऐलान किया कि 2016 से पहले के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को उनके बकाया एरियर का भुगतान वित्त वर्ष 2026 में किया जाएगा। इसके अलावा 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट का भुगतान भी किया जाएगा, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
साथ ही स्टडी लीव पर जाने वाले कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन देने और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने की भी घोषणा की गई है।
सरकार का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद सरकार कर्मचारियों के हितों का ध्यान रख रही है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से बाहर निकलने के लिए सभी को मिलकर योगदान देना होगा।






