Hormuz Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अलीरेजा तंगसीरी (Alireza Tangsiri) की मौत ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पुष्टि की है कि तंगसीरी पिछले हफ्ते इजराइल द्वारा किए गए एयरस्ट्राइक (Airstrike) में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई। हमले के समय वे कोस्टल डिफेंस और समुद्री ऑपरेशंस की निगरानी कर रहे थे, जिससे यह साफ होता है कि यह हमला एक रणनीतिक लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया था।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की रणनीति का बड़ा चेहरा
होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति लाइनों में गिना जाता है। तंगसीरी को इस क्षेत्र में ईरान की नाकेबंदी नीति का मुख्य चेहरा माना जाता था। उनके नेतृत्व में ईरान ने इस मार्ग पर दबाव बनाकर वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित करने की कोशिश की थी। उनकी भूमिका सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने में भी बेहद अहम थी।
ईरान का सख्त संदेश-ऑपरेशन पर कोई असर नहीं
तंगसीरी की मौत के बावजूद ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके सैन्य ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। IRGC के अधिकारियों ने कहा है कि रणनीति पहले की तरह जारी रहेगी और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखने के प्रयास जारी रहेंगे। इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान पीछे हटने के मूड में नहीं है और आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है।
स्पेन का बड़ा फैसला: अमेरिका को नहीं मिलेगा एयरस्पेस
इस बीच स्पेन ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री मार्गारीटा रोब्लेस ने स्पष्ट किया कि स्पेन अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिकी विमानों के लिए नहीं होने देगा। वहीं अर्थव्यवस्था मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने इस युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया, जबकि प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज पहले ही इस सैन्य अभियान की आलोचना कर चुके हैं।
अमेरिका- स्पेन के बीच बढ़ सकता है टकराव
स्पेन के इस फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और व्यापारिक कार्रवाई की धमकी दी है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका और स्पेन के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला पश्चिमी देशों के बीच भी मतभेद को उजागर करता है।
लेबनान विवाद: ईरान ने झुकने से किया इनकार
लेबनान और ईरान के बीच भी तनाव गहराता जा रहा है। लेबनान ने ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया था, लेकिन तय समयसीमा बीतने के बाद भी वे बेरूत में मौजूद हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसका राजदूत अपना काम जारी रखेगा, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और खटास आ गई है।
अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार
ईरान ने अमेरिका के साथ सीधे संवाद से भी इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक बातचीत सिर्फ मध्यस्थों के जरिए हुई है और अमेरिका की शर्तें स्वीकार्य नहीं हैं। इससे यह साफ है कि कूटनीतिक समाधान की राह फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है।
हिजबुल्लाह का दावा: हाइफा नेवल बेस पर हमला
हिजबुल्लाह (Hezbollah) ने दावा किया है कि उसने हाइफा में इजराइली नेवल बेस पर मिसाइलें दागी हैं। इस हमले के बाद वहां स्थित एक ऑयल रिफाइनरी में आग लगने की खबर भी सामने आई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आग सीधे मिसाइल हमले से लगी या गिरते मलबे के कारण।
बढ़ता संकट: तेल, ताकत और वैश्विक असर
पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि मिडिल ईस्ट का संकट अब सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल सप्लाई, व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को सीधे प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास हालात को संभाल पाते हैं या दुनिया एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ती है।






