Hormuz Strait Closed Again: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक बार फिर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने मात्र 24 घंटे के भीतर इस रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है।
ईरान का आरोप: अमेरिका ने तोड़ा सीजफायर समझौता
ईरान का कहना है कि उसने हाल ही में अमेरिका के साथ हुए बातचीत और सीजफायर समझौते के तहत कुछ तेल और मालवाहक जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी। लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने अपने वादों का पालन नहीं किया और नाकेबंदी की कार्रवाई जारी रखी।
तेहरान ने इस कदम को सीधे तौर पर समझौते का उल्लंघन बताया है और कहा है कि अब भरोसे की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
होर्मुज पर सेना का नियंत्रण
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाज उसकी सेना के पूर्ण नियंत्रण में रहेंगे। सरकार का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने कथित प्रतिबंध और नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक इस समुद्री मार्ग से किसी भी अंतरराष्ट्रीय जहाज को आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अमेरिका का रुख और ट्रंप की चेतावनी
अमेरिका ने ईरान के आरोपों को खारिज करते हुए नाकेबंदी हटाने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा बयान देते हुए कहा है कि जब तक ईरान किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंचता, तब तक अमेरिकी रणनीतिक दबाव जारी रहेगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम को हर हाल में अपने नियंत्रण में लेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रहती है, तो आगे और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
अमेरिका ने स्थिति को संभालने के लिए अपने आपातकालीन तेल भंडार से 2.6 करोड़ बैरल तेल जारी किया है, जिसे कई कंपनियों को सप्लाई किया गया है। इसके बावजूद बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच यह नया विवाद एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ा रहा है। वहीं, क्षेत्र में पहले से जारी इजराइल-लेबनान संघर्ष और सीजफायर उल्लंघन की खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विवाद लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।






