Internet Shutdown Alert: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) अब सिर्फ तेल सप्लाई का रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन के तौर पर भी चर्चा में है। ईरान, इजरायल और यूनाइटेड स्टेट्स (US) के बीच बढ़ते टकराव ने इस क्षेत्र को हाई-रिस्क जोन बना दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं या समुद्र के नीचे बिछी केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा।
ऐसे में Facebook, YouTube और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बफरिंग बढ़ सकती है, वीडियो लोड होने में देरी होगी और लाइव स्ट्रीमिंग प्रभावित हो सकती है। इतना ही नहीं, ऑनलाइन क्लास, वर्क फ्रॉम होम, डिजिटल पेमेंट, क्लाउड सर्विस और वीडियो कॉलिंग जैसी रोजमर्रा की सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं। अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हुई, तो कुछ क्षेत्रों में अस्थायी इंटरनेट आउटेज या बार-बार नेटवर्क गिरने जैसी समस्या भी देखने को मिल सकती है, जिससे आम लोगों से लेकर बिजनेस और बैंकिंग सिस्टम तक पर सीधा असर पड़ेगा।
समुद्र के नीचे बिछी है इंटरनेट की असली दुनिया
अक्सर यह माना जाता है कि इंटरनेट सैटेलाइट से चलता है, लेकिन सच्चाई यह है कि दुनिया का करीब 95 से 97 प्रतिशत डेटा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है। ये केबल्स महाद्वीपों को जोड़ती हैं और एशिया को यूरोप व अफ्रीका से कनेक्ट करती हैं। होर्मुज के आसपास से गुजरने वाले रूट्स पर कई अहम केबल नेटवर्क मौजूद हैं, जो भारत समेत कई देशों के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ा खतरा
भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी इन अंतरराष्ट्रीय केबल रूट्स पर काफी हद तक निर्भर है। देश का ज्यादातर इंटरनेट ट्रैफिक अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर इस इलाके में कोई व्यवधान आता है, तो भारत की कनेक्टिविटी पर सीधा असर पड़ सकता है। खासकर यूरोप और अमेरिका के साथ डेटा एक्सचेंज में देरी देखने को मिल सकती है।
इंटरनेट स्लो होने के पीछे की वजह
अगर समुद्री केबल्स को नुकसान होता है, तो इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक लंबी दूरी वाले रूट्स पर डायवर्ट करना पड़ेगा। इससे नेटवर्क पर लोड बढ़ेगा और डेटा ट्रांसफर में देरी होगी। इसका असर आम यूजर्स के साथ-साथ बिजनेस सेक्टर पर भी पड़ेगा। वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन मीटिंग्स और क्लाउड सर्विसेज में रुकावट आ सकती है।
IT सेक्टर और बैंकिंग पर असर
भारत का करीब 250 बिलियन डॉलर का IT सेक्टर रियल-टाइम कनेक्टिविटी पर निर्भर है। इंटरनेट स्लो होने की स्थिति में कंपनियों को सर्विस एग्रीमेंट्स (SLA) तोड़ने का खतरा हो सकता है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान संभव है। इसके अलावा SWIFT जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे ट्रांजेक्शन और रेमिटेंस धीमे पड़ सकते हैं।
क्या पूरी तरह ठप हो जाएगा इंटरनेट?
हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पूरी दुनिया में इंटरनेट का पूरी तरह बंद होना मुश्किल है। इंटरनेट का ढांचा इस तरह बनाया गया है कि एक रास्ता बंद होने पर डेटा दूसरे रास्ते से भेजा जा सकता है। लेकिन इस प्रक्रिया में स्पीड कम हो जाती है और नेटवर्क पर दबाव बढ़ जाता है।
समाधान की तलाश में दुनिया
इस खतरे को देखते हुए भारत समेत कई देश अब वैकल्पिक रूट्स और नई तकनीकों पर निवेश कर रहे हैं। सैटेलाइट इंटरनेट को बैकअप के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि ऐसी परिस्थितियों में कनेक्टिविटी बनी रहे। आने वाले समय में ऐसे नेटवर्क तैयार किए जा रहे हैं, जो संवेदनशील क्षेत्रों को बायपास कर सकें।
बता दें कि होर्मुज में बढ़ता तनाव अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक इंटरनेट सिस्टम पर भी पड़ सकता है। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो दुनिया की डिजिटल स्पीड धीमी पड़ सकती है, और इसका सीधा असर आम लोगों से लेकर बड़े उद्योगों तक देखने को मिलेगा।






