Iran-US Tension: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात में इसे दोबारा खोलना संभव नहीं है। यह वही स्ट्रेट है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने कहा कि जब तक सीजफायर का उल्लंघन जारी है और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक हालात सामान्य नहीं हो सकते। उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई को “वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने” जैसा बताया।
ईरान का कड़ा संदेश
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने साफ किया कि अमेरिका के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ पाने के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला अमेरिकी वादों का उल्लंघन, दूसरा ईरानी बंदरगाहों की लगातार नाकाबंदी और तीसरा बार-बार दी जा रही सैन्य व राजनीतिक धमकियां। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के खिलाफ नहीं है, लेकिन “जमीन पर हालात” इसके अनुकूल नहीं हैं।
अमेरिका का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने हाल ही में युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि होर्मुज के पास अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी रहेगी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) ने कहा कि ईरान के प्रस्ताव पर कोई तय समयसीमा नहीं रखी गई है और अंतिम फैसला राष्ट्रपति ही करेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल दबाव की रणनीति से पीछे हटने के मूड में नहीं है।
इस्लामाबाद वार्ता टली, लेकिन उम्मीद बाकी
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत इस्लामाबाद में होनी थी, लेकिन फिलहाल इसे टाल दिया गया है। पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के अनुरोध पर अमेरिका ने ईरान को एक साझा प्रस्ताव तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। इससे यह उम्मीद बनी हुई है कि अगर हालात थोड़े बेहतर होते हैं, तो दोनों देश जल्द ही बातचीत की टेबल पर लौट सकते हैं।
तनाव के बीच समुद्री टकराव
हालात सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं। ईरान ने MSC फ्रांसेस्का, एपामिनोंडास और यूफोरिया जैसे जहाजों को अपने कब्जे में लिया है, जबकि अमेरिका ने जवाब में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी और कड़ी कर दी है।
इस टकराव का सीधा असर वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधा तय मानी जा रही है।
सबसे बड़ा विवाद: नाकाबंदी
इस पूरे संकट की जड़ अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी बन गई है। ईरान का साफ कहना है कि जब तक यह नाकाबंदी खत्म नहीं होती, तब तक न तो होर्मुज खुलेगा और न ही कोई ठोस शांति समझौता हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर-सईद इरावानी ने भी संकेत दिया है कि अगर अमेरिका नाकाबंदी हटाने को तैयार होता है, तो बातचीत का अगला दौर तुरंत शुरू हो सकता है।
बता दें कि होर्मुज बंद रहने से वैश्विक तेल बाजार को बड़ा झटका लग सकता है। मौजूदा हालात में सीजफायर “कागजी” साबित होता दिख रहा है, जबकि बातचीत की राह अब पूरी तरह अमेरिकी नाकाबंदी हटने पर निर्भर हो गई है।






