अमेरिका पर ईरान को नहीं भरोसा, ”अविश्वास” शांति वार्ता में बड़ी बाधा-ईरान

Abbas Araghchi Statement: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागची ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका पर अविश्वास ही युद्ध खत्म होने में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि वाशिंगटन में हुई नई वार्ता के बाद लेबनान और इज़राइल, हालिया हिंसा भड़कने के बावजूद, 45 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं।

तेहरान ने साफ कहा है कि अमेरिका को ईरान की नई शांति योजना स्वीकार करनी होगी, अन्यथा उसे कूटनीतिक विफलता का सामना करना पड़ेगा। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्य पूर्व में युद्धविराम टूटने की आशंका जताने के बाद आया है।

दो महीने से अधिक पहले अमेरिका और इज़राइल के हमलों के साथ शुरू हुआ यह संघर्ष, युद्धविराम के बावजूद पूरे मध्य पूर्व में फैल चुका है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है और दुनिया भर में करोड़ों लोग इसकी चपेट में आए हैं।

दोनों पक्ष अब तक किसी भी बड़ी रियायत देने को तैयार नहीं हैं और समय-समय पर लड़ाई दोबारा शुरू करने की चेतावनी देते रहे हैं। हालांकि, फिलहाल कोई भी पक्ष पूर्ण युद्ध की स्थिति में लौटता नहीं दिख रहा।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,

“14 सूत्रीय प्रस्ताव में बताए गए ईरानी जनता के अधिकारों को स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। किसी भी अन्य दृष्टिकोण का परिणाम केवल विफलता होगा।”

उन्होंने आगे कहा, जितनी ज्यादा देरी होगी, उतना ही ज्यादा बोझ अमेरिकी करदाताओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर वाशिंगटन ने तेहरान की शर्तों को नजरअंदाज किया, तो क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है तथा शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो सकती है।

Prem Upadhyay

प्रेम उपाध्याय न्यूज प्लस लाइव में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे मार्च 2026 से संगठन की डिजिटल विंग के साथ जुड़े हुए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रणनीति व निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, प्रेम ने लाइव इंडिया, 4 रियल न्यूज और फोकस टीवी जैसे विभिन्न न्यूज चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने क्राइम, बिजनेस, डिफेंस, राजनीति और मनोरंजन जैसे विविध बीट्स पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। वे तथ्य-आधारित पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध हैं और खबरों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए स्रोतों की गहन जांच व तथ्यों के सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

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