US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए दो कंटेनर जहाजों को जब्त कर लिया है। इनमें से एक जहाज भारत के गुजरात की ओर जा रहा था, जिससे यह मामला भारत के लिए भी बेहद अहम हो गया है।
दो जहाज जब्त, भारत आ रहा पोत भी शामिल
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जिन जहाजों को रोका है, उनकी पहचान एमएससी फ्रांसेस्का और एपामिनोंडास के रूप में हुई है। शिप-ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार एपामिनोंडास दुबई के जबेल अली पोर्ट से गुजरात की ओर जा रहा था। इस कार्रवाई के बाद दोनों जहाजों को ईरान की ओर ले जाया जा रहा है।
IRGC का दावा है कि इन जहाजों ने समुद्री नियमों का उल्लंघन किया और बिना अनुमति होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें रोका गया।
बिना चेतावनी फायरिंग का आरोप
ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी यूनाइटेड किंगडम समुद्री व्यापार संचालन (UKMTO) ने दावा किया है कि ईरानी गनबोट ने एक जहाज पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के गोलीबारी की। रिपोर्ट के मुताबिक सुबह करीब 7:55 बजे इस अहम समुद्री रूट पर यह घटना हुई।
हालांकि इस फायरिंग में किसी के घायल होने या बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इससे समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं ईरान की सरकारी मीडिया का कहना है कि जहाज ने कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
लाइबेरिया के झंडे वाला जहाज भी निशाने पर
रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस जहाज पर गोलीबारी हुई, वह लाइबेरिया के झंडे के साथ इस मार्ग से गुजर रहा था। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों का कहना है कि जहाज को पहले से इस मार्ग से गुजरने की अनुमति थी।
इसके बावजूद हुई कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रणनीतिक रूप से अहम है होर्मुज
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का टकराव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ेगा और बीमा लागत में इजाफा हो सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ा खतरा
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत ठप पड़ी है और सीजफायर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र में इस तरह की आक्रामक कार्रवाई यह संकेत देती है कि दोनों देश अब दबाव बनाने के लिए सैन्य और रणनीतिक मोर्चों पर सक्रिय हो गए हैं, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।
भारत समेत वैश्विक असर की आशंका
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत सहित पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया से आने वाली तेल सप्लाई इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर करती है, ऐसे में किसी भी तरह की बाधा से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही शिपिंग रूट असुरक्षित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव पड़ सकता है। बढ़ते जोखिम के कारण जहाजों के बीमा प्रीमियम और परिवहन लागत में भी इजाफा होने की संभावना है। कुल मिलाकर, होर्मुज में बढ़ता तनाव अब एक बड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुका है, जो समुद्री सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहा है।






