Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ईरान के अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स (Tehran Times) ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए अपने फ्रंट पेज पर लिखा- “Welcome to Hell”। अखबार ने साफ कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर कदम रखते हैं, तो वे “ताबूत में वापस लौटेंगे”। इस बयान ने क्षेत्र में पहले से बढ़े तनाव को और भड़का दिया है।
US की बढ़ी सैन्य मौजूदगी
ईरानी चेतावनी के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए करीब 3,500 अतिरिक्त सैनिक मिडिल ईस्ट भेजे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक ये सैनिक USS त्रिपोली के जरिए क्षेत्र में पहुंचे हैं।
ये सभी सैनिक 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट का हिस्सा हैं, जिनके साथ ट्रांसपोर्ट और फाइटर एयरक्राफ्ट भी तैनात किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह तैनाती संभावित सैन्य टकराव की तैयारी का संकेत मानी जा रही है।
पाकिस्तान में कूटनीतिक हल की कोशिश
तनाव के बीच इस्लामाबाद (Islamabad) में रविवार को तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) से भी मुलाकात होगी।
इस बैठक का मकसद मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर चर्चा कर कूटनीतिक समाधान तलाशना है। पाकिस्तान को इसलिए चुना गया क्योंकि उसके ईरान और सऊदी अरब दोनों से अच्छे संबंध हैं, जिससे उसे एक न्यूट्रल मंच माना जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर राहत
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) ने बताया कि ईरान ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से गुजरने की अनुमति दे दी है।
समझौते के तहत रोजाना दो जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरेंगे। यह रूट वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।
UAE और लेबनान में बढ़ता खतरा
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रक्षा मंत्रालय ने देश में मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दक्षिणी लेबनान में हालिया हमलों में 9 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। लगातार हमलों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और कई अस्पताल बंद करने पड़े हैं।
रूस की गतिविधियों पर बड़ा दावा
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने दावा किया है कि रूस मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों की निगरानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुवैत, सऊदी अरब, तुर्किये और कतर सहित कई देशों में स्थित सैन्य ठिकानों की तस्वीरें ली गई हैं। इसके अलावा हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य बेस का भी जिक्र किया गया है।
बढ़ता खतरा, अनिश्चित भविष्य
मिडिल ईस्ट इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। एक तरफ ईरान की तीखी चेतावनी, दूसरी ओर अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती और बीच में कूटनीतिक प्रयास—इन सबके बीच स्थिति कब और कैसे बदल जाए, यह कहना मुश्किल है।
आने वाले दिन तय करेंगे कि यह तनाव बातचीत से कम होगा या किसी बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।






