नई दिल्ली: भारतीय शिक्षण मंडल, दिल्ली प्रांत द्वारा 57वां स्थापना दिवस कार्यक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस महाविद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘स्वबोध- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का मार्ग’ रहा, जिसमें शिक्षा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया।
सभ्यता की जड़ों में शक्ति: प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि भारत आज संकल्प और शोध के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों के आक्रमणों के बावजूद भारतीय सभ्यता आज भी जीवित है, क्योंकि इसकी जड़ें मजबूत हैं।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हर व्यक्ति अपने स्तर पर प्रयास करे, क्योंकि समाज की मुक्ति सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

57th Foundation Day of Bharatiya Shikshan Mandal
सकारात्मक सोच और शांति का संदेश: प्रो. राजेंद्रकुमार अनायत
मुख्य वक्ता महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्रकुमार अनायत ने कहा कि व्यक्ति को अच्छा बोलना, देखना और सुनना चाहिए, जिससे स्वबोध स्वतः विकसित होता है।
उन्होंने मंत्रों में तीन बार ‘शांति’ उच्चारण का अर्थ समझाते हुए कहा कि यह विश्व, समाज और स्वयं के लिए शांति की प्रार्थना है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य की बुद्धि ही उसे विशेष बनाती है, और जब तक वह स्वयं हार नहीं मानता, कोई शक्ति उसे झुका नहीं सकती।
मातृभाषा में शिक्षा पर जोर: डॉ. अनिल अग्रवाल
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत के संघ चालक डॉ. अनिल अग्रवाल ने शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से दिमाग का बेहतर विकास होता है, फिर भी हम इसे अपनाने में पीछे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास संघर्ष का रहा है, न कि गुलामी का, और हमें अपने मानकों पर खुद को आंकने की जरूरत है, न कि दुनिया के पैमानों से।

57th Foundation Day of Bharatiya Shikshan Mandal
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का आह्वान
स्वागत भाषण में भारतीय शिक्षण मंडल, दिल्ली प्रांत के उपाध्यक्ष प्रो. रवींद्र गुप्ता ने कहा कि संस्था शिक्षा में फैली औपनिवेशिक मानसिकता को दूर करने के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि आज भी हम मानसिक रूप से गुलाम हैं और विदेशी ज्ञान को श्रेष्ठ तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर मानते हैं, लेकिन अब इस सोच में बदलाव आ रहा है। उन्होंने सभी से इस दिशा में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
‘सार्थक’ पत्रिका का विमोचन
इस अवसर पर दिल्ली प्रांत द्वारा प्रकाशित ‘सार्थक’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी.आर. शंकरानंद का विशेष सानिध्य रहा।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम की शुरुआत ध्येय श्लोक और ध्येय वाक्य के साथ हुई। संचालन और अतिथियों का परिचय डॉ. मनीषा चौरसिया ने दिया, जबकि डॉ. बबिता सिंह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अंत में डॉ. धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र और ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ।







