Parliament Session: लोकसभा में नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जो भी हथियार उठाएगा, उसे उसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में आंतरिक सुरक्षा को लेकर लगातार रणनीतिक बदलाव किए जा रहे हैं।
“भारत अब नक्सल मुक्त होने के करीब”
अपने संबोधन में गृह मंत्री ने दावा किया कि भारत अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 31 मार्च तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा था और इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल हुई है।
पूर्व सरकारों पर सवाल, 2014 के बाद बदलाव
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें माओवादी हिंसा को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया गया था।
हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार के आने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू हुई और हालात तेजी से बदले।
हिंसा पर ‘जीरो टॉलरेंस’, बातचीत के दरवाजे खुले
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान को नकारकर बंदूक उठाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।
रेड कॉरिडोर की चुनौती और आंकड़े
शाह ने बताया कि एक समय देश का रेड कॉरिडोर पूरी तरह से अस्थिर हो चुका था, जिससे करीब 12 करोड़ लोग प्रभावित थे। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नक्सल हिंसा में लगभग 20 हजार युवाओं की जान जा चुकी है, जो देश के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय रहा है।
बस्तर में बदली तस्वीर, विकास बना हथियार
गृह मंत्री के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे इलाकों में अब नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है।
सरकार ने इन क्षेत्रों में विकास को प्राथमिकता दी है-
- गांव-गांव में स्कूलों की स्थापना
- राशन दुकानों का विस्तार
- अस्पतालों की सुविधा
- आधार कार्ड, मुफ्त राशन और गैस कनेक्शन जैसी योजनाएं
इन प्रयासों से स्थानीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली है।
संविधान के खिलाफ नहीं चलेगी बंदूक
अमित शाह ने दो टूक कहा कि भारत में संविधान सर्वोपरि है। संविधान को नकारकर हथियार उठाना लोकतंत्र के खिलाफ है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
1970 से 2026 तक की लड़ाई पर चर्चा
अपने भाषण के अंत में गृह मंत्री ने कहा कि 1970 से 2026 तक नक्सलवाद के खिलाफ चली लड़ाई पर संसद में हो रही यह चर्चा बेहद अहम है।
यह न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा की दिशा तय करेगी, बल्कि भविष्य की रणनीतियों का भी आधार बनेगी।







