Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में साफ कहा कि उन्हें जानबूझकर खामोश करने की कोशिश की गई है, लेकिन वह हार मानने वाले नहीं हैं।
खामोश कराया गया, लेकिन मैं हारा नहीं– राघव चड्ढा
सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा-
“मुझे खामोश कराया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं। यह मेरी आवाज आम आदमी के लिए है।”
उन्होंने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि उन्होंने हमेशा जनता के मुद्दों को उठाया और वही उनकी राजनीति का मूल रहा है। चड्ढा के इस बयान को सीधे तौर पर पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।
जनता के मुद्दों का हवाला, पार्टी पर अप्रत्यक्ष सवाल
हालांकि राघव चड्ढा ने अपने वीडियो में बिना किसी का नाम लिए पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर वह जनता के मुद्दे उठा रहे थे, तो इससे पार्टी को नुकसान कैसे हो सकता है?
https://x.com/raghav_chadha/status/2039923569988419809
उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वह अपने कदमों को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और यह बताना चाहते हैं कि उनकी राजनीति जनता केंद्रित रही है, न कि संगठन के भीतर सीमित।
मैं सैलाब बनकर लौटूंगा- राघव चड्ढा
वीडियो के अंत में राघव चड्ढा का अंदाज और ज्यादा आक्रामक नजर आया। उन्होंने कहा कि
“मेरी आवाज दबाने वालों के सामने मैं सैलाब बनकर आऊंगा।”
इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी नेता या गुट का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों से साफ है कि वह दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।
उपनेता पद से हटाए गए राघव चड्ढा
गुरुवार को AAP ने अचानक बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल (Ashok Mittal) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी स्पष्ट किया कि अब चड्ढा को सदन में पार्टी की ओर से बोलने का अधिकार नहीं दिया जाए। हालांकि, इस कार्रवाई के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।
गंभीर मुद्दों से दूरी, पार्टी लाइन का उल्लंघन- AAP
AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा (Anurag Dhanda) ने चड्ढा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह संसद में पार्टी के अहम मुद्दों को उठाने के बजाय गैर-जरूरी विषयों पर ध्यान दे रहे थे।
ढांडा ने यह भी आरोप लगाया कि चड्ढा ने पार्टी के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अगर कोई नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से डर जाए, तो वह देश के लिए कैसे लड़ेगा?”
यह बयान पार्टी और चड्ढा के बीच बढ़ते टकराव को खुलकर सामने लाता है।
भगवंत मान ने चड्ढा को “कंप्रोमाइज्ड” नेता बताया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने भी इस विवाद पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो भी नेता पार्टी लाइन के खिलाफ जाता है, उसके खिलाफ कार्रवाई होना तय है।

मान ने राघव चड्ढा को “Compromised” बताते हुए यह संकेत दिया कि पार्टी अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो।
लंबे समय से दूरी और चुप्पी ने बढ़ाए सवाल
बता दें कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए थे। 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनका कार्यकाल 2028 तक है, लेकिन हाल के महीनों में उन्होंने पार्टी के बड़े मुद्दों पर सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
यहां तक कि जब अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) जेल गए थे, तब भी चड्ढा विदेश (UK) में थे और उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। केजरीवाल को राहत मिलने के बाद भी उनकी ओर से कोई बयान नहीं आया, जिससे पार्टी के भीतर उनकी भूमिका पर सवाल उठने लगे।
AAP में बढ़ती दरार?
गौरतलब है कि पूरा घटनाक्रम AAP के अंदर बढ़ते मतभेदों की ओर इशारा करता है। एक तरफ राघव चड्ढा अपने बयान से यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह दबाव में नहीं झुकेंगे, वहीं पार्टी नेतृत्व भी सख्त अनुशासन का संदेश दे रहा है।
हालांकि अभी तक चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन उनके तेवर और पार्टी की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है।







