Global Economic Inflation Crisis: अमेरिका-ईरान के बीच जारी जंग से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है। तेल की कीमतों में उछाल की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने से उपजी स्थिति का बड़ा कारण युद्ध का लंबा खिंचना या किसी नतीजे पर न पहुंचना है, जो और भी विषम स्थिति पैदा कर रहा है। तेल की कीमतें तो बस उस हिमशैल का सिरा भर हैं, जो पूरी दुनिया में बड़ी समस्याएँ खड़ी कर सकता है।
तेल कीमतों से परे संकट के संकेत
ईरान पर युद्ध के चलते तेल की कीमतों में आई तेजी ने ज़्यादातर सुर्खियाँ बटोरी हैं। कई जानकारों के लिए इस संकट की गंभीरता को ब्रेंट टिकर में होने वाले रोज़ाना के बदलावों से मापा जा सकता है। कुछ विश्लेषकों ने उर्वरक बाजारों में उभरते तनाव की ओर भी इशारा करना शुरू कर दिया है। लेकिन इन जाने-पहचाने संकेतों के पीछे कई ऐसे संकेत भी हैं जो कम दिखाई देते हैं और कुछ मामलों में ज्यादा बुनियादी हैं और अब वे शेयर बाजारों के डिस्प्ले पर रेड दिखा रहे हैं।
नेफ्था की अहम भूमिका
नेफ़्था, जो पेट्रोकेमिकल्स के लिए एक फीडस्टॉक है, एक ऐसा अहम किरदार है जो अक्सर पर्दे के पीछे ही रहता है। नेफ़्था शायद ही कभी सुर्खियों में आता है, लेकिन यह कई आधुनिक तकनीकों के उत्पादन के लिए बेहद ज़रूरी है। इतना ही नहीं, रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले अनगिनत प्लास्टिक उत्पादों, कार के पुर्ज़ों, मेडिकल सामानों और पैकेजिंग सामग्री यानी आप जिस भी चीज का नाम लें के लिए भी यह उतना ही अहम है। नेफ्था पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन की बुनियाद में मौजूद होता है। ऐसे में, अगर इसकी सप्लाई में जरा भी रुकावट आ जाए, तो यह पूरी व्यवस्था में भारी उथल-पुथल मचा सकता है।
पेट्रोकेमिकल कंपनियों पर असर
जापान की LG Chem और Lotte Chemical जैसी कई बड़ी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को फीडस्टॉक की कमी के कारण उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है या अपनी क्रैकिंग यूनिट्स को बंद करना पड़ रहा है। इससे प्लास्टिक और पैकेजिंग की सप्लाई में रुकावट आई है, जिसका असर कंज्यूमर गुड्स से लेकर मेडिकल सप्लाई तक के उत्पादों पर पड़ा है।
डीजल: असली अर्थव्यवस्था का ईंधन
डीज़ल को “असली अर्थव्यवस्था का ईंधन” कहा जाता है। यह सभी भारी औद्योगिक इकाइयों के अलावा ट्रक, जहाज, निर्माण कार्य, खनन और कृषि में इस्तेमाल होता है। क्योंकि डीज़ल ही “असली अर्थव्यवस्था” का ईंधन है, इसलिए इसकी कीमतों में अचानक उछाल से आम तौर पर महंगाई बढ़ सकती है। विश्लेषकों के मुताबिक, डीजल की कीमत $5 प्रति गैलन होने पर ग्राहकों के लिए कीमतें 35% तक बढ़ सकती हैं।
क्रैक स्प्रेड क्या है?
एक रिफाइनर कच्चे तेल के लिए जो कीमत चुकाता है और जिस कीमत पर वह तैयार उत्पाद बेचता है, उनके बीच के अंतर को ‘क्रैक स्प्रेड’ कहा जाता है। यह शब्द रिफाइनिंग प्रक्रिया को दर्शाता है। एक सामान्य क्रैक स्प्रेड $10 से $20 के बीच होता है, हालांकि यह उत्पाद और क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। मौजूदा समय में 50 डॉलर से ज्यादा का क्रैक स्प्रेड उत्पन्न हो गया है। इसका मतलब है कि कच्चे तेल की तुलना में रिफाइंड ईंधन ज्यादा कीमती होते जा रहे हैं।
सप्लाई चेन में छिपे संकट का खतरा
अहम जगहों पर कई नाकामियों के एक साथ होने से संकटों की एक पूरी श्रृंखला शुरू हो सकती है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को भारी और लंबे समय तक चलने वाला नुकसान पहुंच सकता है। जब दुनिया का काम-काज ठीक-ठाक चल रहा होता है, तो कोई भी नेफ्था या सल्फर के बारे में ज्यादा नहीं सोचता। लेकिन ये और कई दूसरे इनपुट, ईंधन और फीडस्टॉक ही हैं जो पूरे सिस्टम को चलाते हैं, और इनकी कमी होते ही तुरंत एक बड़ा संकट खड़ा हो जाता है।








