UAE Warning to America: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका से साफ कहा है कि वह ईरान पर दोबारा सैन्य हमला न करे। UAE का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में फिर से युद्ध शुरू हुआ तो इसका असर सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक UAE ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में कहा कि युद्ध की जगह बातचीत और कूटनीति को मौका देना चाहिए। UAE का कहना है कि हमला करने से हालात और बिगड़ेंगे और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी।
तेल सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
UAE ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ा तो इसका सीधा असर तेल सप्लाई पर पड़ेगा। मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में युद्ध होने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और दुनियाभर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों को डर है कि लंबे संघर्ष से व्यापार, निवेश और समुद्री रास्तों पर भी असर पड़ेगा। इसी वजह से अब कई अरब देश खुलकर युद्ध रोकने की बात कर रहे हैं।
बदला हुआ दिख रहा UAE का रुख
पहले UAE ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाता था, लेकिन अब उसका रुख बदला हुआ नजर आ रहा है। हालिया तनाव और आर्थिक नुकसान की आशंका को देखते हुए अब अबू धाबी खुलकर शांति और बातचीत की बात कर रहा है।
इससे पहले Saudi Arabia और Qatar भी अमेरिका से ईरान पर हमला न करने की अपील कर चुके हैं। हालांकि इन देशों के बीच इस बात पर मतभेद हैं कि ईरान के साथ कैसा समझौता होना चाहिए, लेकिन सभी देश युद्ध टालना चाहते हैं।
तेहरान पहुंचे पाकिस्तान के सेना प्रमुख
इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir शुक्रवार को तेहरान पहुंचे। माना जा रहा है कि उनका यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश का हिस्सा है।
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान क्षेत्र में शांति बनाए रखने और बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इस दौरे को लेकर पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट संकट के बीच दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर भी टिकी हुई है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल सप्लाई करता है।
अगर यहां तनाव बढ़ता है या रास्ता बंद होता है तो दुनियाभर में तेल संकट खड़ा हो सकता है। इसी वजह से France ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक नया प्रस्ताव तैयार किया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मिशन के जरिए जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल की जा सके।
रूस और चीन ने जताई आपत्ति
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और बहरीन भी अलग प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, लेकिन रशिया और चीन इसके विरोध में हैं।
दोनों देशों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मिशन के नाम पर अमेरिका इस इलाके में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना चाहता है। साथ ही रूस और चीन, ईरान के करीबी माने जाते हैं, इसलिए वे ऐसे किसी प्रस्ताव का समर्थन करने से बच रहे हैं।






