UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए यूपी सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि पंचायत चुनाव संवैधानिक समयसीमा के भीतर क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। साथ ही यह भी जानना चाहा कि क्या निर्धारित अवधि में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई जा सकेगी।
यह सुनवाई याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की याचिका पर हुई। याचिका में दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्ष का होता है, इसलिए समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।
वहीं, आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12BB के तहत पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, जो आयोग के परामर्श से होती है।
हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह चुनाव की तैयारियों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। अब अगली सुनवाई में यह तय होने की संभावना है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे या इसमें और देरी हो सकती है।






