Rajnath Singh On SCO Meeting: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) की बैठक में वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद और सहयोग को लेकर भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब वैश्विक माहौल खंडित है, ऐसे में एससीओ की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है और दुनिया को मिलकर आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि एससीओ क्षेत्र दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं और साझा सांस्कृतिक धरोहरों का केंद्र रहा है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक व्यापार मार्गों, उद्यमिता और सांस्कृतिक संबंधों से समृद्ध रहा है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में विश्व में एकतरफावाद और संघर्ष लगातार बढ़ रहे हैं। वैश्विक सहमति कमजोर हो रही है और मतभेद अधिक स्पष्ट होते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में लगातार युद्ध और संघर्षों ने भारी जन-धन की हानि पहुंचाई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह समय रक्षा और सुरक्षा तंत्र के लिए आत्मचिंतन का है। आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ आज सबसे बड़े वैश्विक खतरे के रूप में उभर चुके हैं।
आतंकवाद पर सख्त रुख
उन्होंने कहा कि एससीओ ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाया है और तियानजिन डिक्लेरेशन ने इस दिशा में सदस्य देशों की एकजुटता को और मजबूत किया है। पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरी मानवता को झकझोर दिया और यह साबित किया कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता।
ऑपरेशन सिंदूर और जीरो टॉलरेंस नीति
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की “जीरो टॉलरेंस” नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या देश नहीं होता और इसे एक वैश्विक खतरे के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि स्टेट-स्पॉन्सर्ड और क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। दोहरे मानदंडों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए और सभी देशों को एक समान दृष्टिकोण अपनाना होगा।
RATS की अहम भूमिका
राजनाथ सिंह ने एससीओ के रीजनल एंटी-टेरर स्ट्रक्चर (RATS) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ, अलगाववाद और आतंकवाद से मुकाबले के लिए सभी देशों को मिलकर एक साझा मोर्चा तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा “न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” बनाने का नहीं, बल्कि एक “अधिक व्यवस्थित विश्व व्यवस्था” विकसित करने का है। इसके लिए युद्ध और हिंसा नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति ही सही मार्ग है।
अपने संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने कहा कि “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत पर आधारित सहयोग ही दुनिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने का सबसे मजबूत आधार है।






