US NATO controversy: ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और NATO देशों के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप NATO देशों के रवैये से बेहद नाराज हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई देश संकट के समय अमेरिका की मदद नहीं करता और अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता, तो फिर वह NATO में क्यों है?
रूबियो ने खास तौर पर स्पेन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान युद्ध के दौरान स्पेन ने अमेरिकी सेना को अपने सैन्य बेस इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी। रूबियो ने कहा कि अमेरिका NATO का हिस्सा इसलिए है ताकि जरूरत पड़ने पर यूरोप और मिडिल ईस्ट में मौजूद सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सके।
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उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन NATO देशों से ज्यादा सहयोग की उम्मीद कर रहा था, लेकिन कई देशों का रवैया निराशाजनक रहा। अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ कहा कि वॉशिंगटन अब NATO सहयोगियों की भूमिका की गंभीर समीक्षा कर सकता है।
रूबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों से सिर्फ राजनीतिक समर्थन नहीं बल्कि वास्तविक सैन्य और रणनीतिक सहयोग चाहता है। उनके बयान के बाद NATO देशों के भीतर भी नई बहस शुरू हो गई है कि गठबंधन के सदस्य देशों की जिम्मेदारियां क्या होनी चाहिए।
इसी बीच रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को जितनी जरूरत हो उतनी ऊर्जा बेचने को तैयार है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच तेल और गैस निर्यात को लेकर बातचीत जारी है और अमेरिका चाहता है कि भारत उसके ऊर्जा निर्यात का बड़ा साझेदार बने।
रूबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्वाड देशों की बैठक जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
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उधर ईरान ने अमेरिका के साथ यूरेनियम संवर्धन और बातचीत को लेकर चल रही खबरों को खारिज कर दिया है। वहीं इजरायल ने दक्षिणी सीरिया में आर्टिलरी हमला किया है, जिससे मिडिल ईस्ट का तनाव और बढ़ गया है।






