अयोध्या में रामनवमी के अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने राम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह उनका पहला दौरा था, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
“धर्म की राजनीति नहीं करता”
दिग्विजय सिंह ने अपने इस दौरे को लेकर कहा कि वे धर्म की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने कभी राम मंदिर का विरोध नहीं किया और हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार धर्म का पालन करने का अधिकार है। उनका कहना था कि धर्म का उपयोग न तो राजनीति के लिए होना चाहिए और न ही किसी व्यापार के लिए।
“श्रीराम ने बुलाया, मैं चला आया”
अयोध्या (Ayodhya) पहुंचने पर उन्होंने कहा, “जब भगवान बुलाते हैं, तभी कोई यहां आता है।
“श्रीराम ने बुलाया, मैं चला आया।”
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के दर्शन के साथ हनुमान गढ़ी मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करना भी जरूरी है।
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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के अयोध्या आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब उन्हें भी बुलावा मिलेगा, वे जरूर आएंगे।
रामनवमी पर खास दौरा
देशभर में रामनवमी के मौके पर यह दौरा खास माना जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने पहले हनुमान गढ़ी में पूजा-अर्चना की और उसके बाद रामलला के दर्शन किए।
मंदिर निर्माण में दिया था योगदान
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1,11,111 रुपए का दान भी दिया था। यह दान 18 जनवरी 2021 को मंदिर निर्माण के लिए दिया गया था। उनके कार्यालय की ओर से उन्हें “सच्चा सनातनी” बताया गया और कांग्रेस के योगदान का भी जिक्र किया गया।
सियासी मायने
राम मंदिर के मुद्दे पर लंबे समय से कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) के बीच राजनीतिक टकराव रहा है। ऐसे में दिग्विजय सिंह का यह दौरा और उनका “श्रीराम ने बुलाया” वाला बयान सियासत में नए संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, उन पर पहले भी राम विरोधी और सनातन विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं, जिन्हें उन्होंने हमेशा खारिज किया है।
रामनवमी जैसे धार्मिक अवसर पर अयोध्या पहुंचकर दिग्विजय सिंह ने आस्था का संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन भारतीय राजनीति में धर्म और सियासत के बीच की दूरी आज भी बहस का बड़ा विषय बनी हुई है।






