रिकॉर्ड राजस्व का ऐलान
भारतीय और रूसी रक्षा निर्माताओं के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने पिछले वित्तीय वर्ष में ऐतिहासिक राजस्व दर्ज किया है। यह जानकारी भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने साझा की है।
48.6% की जबरदस्त वृद्धि
डीआरडीओ के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी की आय 548.24 मिलियन डॉलर रही। यह पिछले वर्ष के 368.9 मिलियन डॉलर के मुकाबले 48.6% की बड़ी वृद्धि है।
निर्यात बाजार में बढ़ती पकड़
डीआरडीओ ने बताया कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस वैश्विक रक्षा बाजार में लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान 420 मिलियन डॉलर के दो निर्यात ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
वियतनाम के साथ बड़ा सौदा संभव
वियतनाम के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता प्रक्रिया में है। संभावना है कि अगले सप्ताह राष्ट्रपति तो लाम की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
क्या शामिल होगा समझौते में
इस प्रस्तावित समझौते में तटीय रक्षा के लिए तट-आधारित ब्रह्मोस बैटरी, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और मिसाइलों का पहला जत्था शामिल होगा। इसकी अनुमानित लागत 611.5 मिलियन डॉलर बताई गई है।
रूस की मंजूरी, रणनीतिक संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को ने इस तकनीकी हस्तांतरण को मंजूरी दे दी है। यह भारत, रूस और वियतनाम के बीच मजबूत होते रक्षा सहयोग का संकेत माना जा रहा है।
दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती ताकत
यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो वियतनाम सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को अपने शस्त्रागार में शामिल करने वाला दक्षिण-पूर्व एशिया का तीसरा देश बन जाएगा।
निर्यात लक्ष्य की ओर बड़ा कदम
ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने 2025-26 में करीब 4000 करोड़ रुपये के दो निर्यात ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित रक्षा निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल रही है।
समय पर डिलीवरी का भरोसा
कंपनी सशस्त्र बलों की सभी आवश्यकताओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर रही है, जिससे उसकी विश्वसनीयता और वैश्विक साख लगातार मजबूत हो रही है।






