मध्य अफ्रीका में EBOLAसंक्रमण बढ़ने के बाद भारत सरकार ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी है. सरकार ने प्रमुख हवाई अड्डों पर सख्त स्क्रीनिंग व्यवस्था लागू की है। WHO ने EBOLA प्रकोप को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। इबोला संक्रमण बढ़ने के बाद भारत सरकार ने ये कदम उठाए हैं
1. हाई-लेवल अलर्ट और समीक्षा
WHO ने 17 मई को DRC और युगांडा में बंडीबुग्यो स्ट्रेन के इबोला को “Public Health Emergency of International Concern” घोषित किया। इसके तुरंत बाद
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्त* ने सभी राज्यों/UT के साथ मीटिंग की और तैयारियों का रिव्यू किया।
2. एयरपोर्ट/बंदरगाह पर स्क्रीनिंग कड़ी
– थर्मल स्क्रीनिंग: DRC, युगांडा, साउथ सूडान से आने वाले यात्रियों की जांच dd72
– 21 दिन निगरानी: बुखार या इबोला जैसे लक्षण वाले यात्रियों को आइसोलेट करके 21 दिन तक मॉनिटर किया जाएगा।
– केरल में खास इंतजाम: अफ्रीका और खाड़ी देशों से ज्यादा ट्रैवल के कारण केरल के एयरपोर्ट/सीपोर्ट पर स्पेशल सर्विलांस जारी है ।
3. ट्रैवल एडवाइजरी जारी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने गैर-जरूरी यात्रा न करने की सलाह दी है DRC, युगांडा और साउथ सूडान के लिए।
यात्रियों को कहा गया है कि अगर बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त, सिरदर्द, रैश जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर से संपर्क करें।
4. अस्पताल और लैब तैयार
– NIV पुणे : सैंपल टेस्टिंग के लिए पूरी तरह तैयार। जरूरत पड़ने पर और ICMR लैब भी एक्टिव होंगी
– आइसोलेशन वार्ड :राज्यों को आइसोलेशन फैसिलिटी, डेडिकेटेड एंबुलेंस, PPE, ट्रेंड स्टाफ तैयार रखने को कहा
– IDSP निगरानी: इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत यात्रियों में बीमारी के क्लस्टर पर नजर
5. बड़े इवेंट स्थगित
एहतियात के तौर पर India-Africa Summit 2026 और IBC से जुड़े कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं।
भारत सरकार का बयान के मुताबिक भारत में अभी इबोला का कोई केस नहीं है । सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक बंडीबुग्यो स्ट्रेन का एक भी केस नहीं मिला है । स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा “सरकार पूरी तरह सतर्क है, लेकिन पैनिक की कोई बात नहीं है । AIIMS के मुताबिक भारत का रिस्क कम है क्योंकि इबोला हवा से नहीं फैलता, सिर्फ संक्रमित बॉडी फ्लुइड से फैलता है। कोविड के बाद भारत की तैयारी काफी बेहतर है। ये बंडीबुग्यो स्ट्रेन है जिसका कोई अप्रूव्ड वैक्सीन या इलाज नहीं है। मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। DRC में अब तक 136+ मौतें हो चुकी हैं।






