Narendra Modi: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले प्रचार समाप्त होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मतदाताओं के नाम एक भावुक चिट्ठी लिखकर राजनीतिक माहौल को नया आयाम दे दिया है। हिंदी और बांग्ला दोनों भाषाओं में जारी इस पत्र के साथ प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इसका ऑडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने खुद अपनी आवाज़ में इस संदेश को पढ़ा।
चिट्ठी में प्रधानमंत्री ने लिखा कि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें थकान का अनुभव नहीं हुआ, बल्कि एक निरंतर ऊर्जा महसूस होती रही। उन्होंने इस ऊर्जा का स्रोत मां काली को बताते हुए कहा कि संभवतः मां काली उन्हें नई शक्ति प्रदान कर रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बंगाल में प्रचार के दौरान उन्हें वही आध्यात्मिक अनुभूति हुई, जैसी किसी देवी मंदिर में दर्शन करते समय होती है।
पश्चिम बंगाल के पूरे चुनाव अभियान के दौरान मुझे अपने परिवारजनों का जो अपार स्नेह और आशीर्वाद मिला है, उसने एक नई ऊर्जा से भर दिया है। यहां की युवाशक्ति हो या नारीशक्ति, हमारे किसान भाई-बहन हों, श्रमिक या फिर कारोबारी, सभी ‘विकसित बंगाल’ के लिए संकल्पित हैं। मैंने इस पत्र में उनके… pic.twitter.com/IKH447nWn2
— Narendra Modi (@narendramodi) April 27, 2026
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में जनवरी 2024 में अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुई रामलला प्राण-प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया। उन्होंने 11 दिनों के कठिन अनुष्ठान को याद करते हुए कहा कि वह अनुभव उनके जीवन का एक आध्यात्मिक पड़ाव था और बंगाल की जनता के बीच उन्हें वैसी ही अनुभूति दोबारा हुई। इस तरह उन्होंने आस्था और राजनीति को एक सूत्र में जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि उनके लिए जनसेवा का मार्ग भक्ति और तपस्या से होकर गुजरता है।
पत्र में प्रधानमंत्री ने बंगाल के वर्तमान और भविष्य पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों और श्रमिकों का जिक्र करते हुए “विकसित बंगाल” का संकल्प दोहराया। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उन्होंने “खुला आसमान” और “सम्मानजनक जीवन” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही “भय बहुत हुआ, अब भरोसा चाहिए” जैसे वाक्य के जरिए उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे पर अप्रत्यक्ष रूप से राज्य सरकार को घेरा।
पश्चिम बंगाल के पूरे चुनाव अभियान के दौरान मुझे अपने परिवारजनों का जो अपार स्नेह और आशीर्वाद मिला है, उसने एक नई ऊर्जा से भर दिया है। यहां की युवाशक्ति हो या नारीशक्ति, हमारे किसान भाई-बहन हों, श्रमिक या फिर कारोबारी, सभी ‘विकसित बंगाल’ के लिए संकल्पित हैं। मैंने इस पत्र में उनके… pic.twitter.com/IKH447nWn2
— Narendra Modi (@narendramodi) April 27, 2026
प्रधानमंत्री ने रैलियों के दौरान मिले लोगों के पत्र, चित्र और संदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि वह रात में समय निकालकर उन्हें पढ़ते हैं और जवाब देने की कोशिश करते हैं। इस तरह उन्होंने खुद को एक ‘अभिभावक’ के रूप में प्रस्तुत किया, जो केवल एक राजनेता नहीं बल्कि जनता की भावनाओं से सीधे जुड़ा हुआ है।
चिट्ठी में भाजपा के संभावित मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का उल्लेख भी किया गया है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य में परिवर्तन के बाद यह समारोह पूरे बंगाल के लिए उत्सव का क्षण होगा, जिसे सभी मिलकर मनाएंगे। इसे चुनावी जीत को लेकर उनके आत्मविश्वास के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की यह चिट्ठी केवल एक चुनावी अपील नहीं, बल्कि आस्था, भावनात्मक जुड़ाव और विकास के वादों का एक व्यापक संदेश है, जिसमें रामलला से लेकर मां काली तक के सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए बंगाल की जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश की गई।






