Global Oil Price Surge: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर किए गए हमलों ने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया है। कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतें दोगुनी होकर 146 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जबकि नेचुरल गैस की कीमतों में भी 30 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।
20 दिन में दोगुना हुआ कच्चा तेल
जंग से पहले 27 फरवरी को इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 18 मार्च तक बढ़कर 146 डॉलर पर पहुंच गई। वहीं इंटरनेशनल ब्रेंट क्रूड भी 73 डॉलर से बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार और आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
- पेट्रोल-डीजल और LPG महंगे होने के संकेत
अगर क्रूड की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम 10 से 15 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल अपने मार्जिन कम करके कीमतों को नियंत्रित कर रही हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी सुरक्षित है, लेकिन हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
- खाने-पीने की चीजें भी होंगी महंगी
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता। प्लास्टिक, पेंट, फर्टिलाइजर और दवाइयों के निर्माण में भी इसका इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
यूरोप में गैस संकट गहराया
ईरान के हमलों का असर यूरोप में भी साफ दिखाई दे रहा है। डच TTF गैस बेंचमार्क एक समय 30 प्रतिशत तक उछलकर 70 यूरो तक पहुंच गया था, जो फिलहाल 63 यूरो के आसपास ट्रेड कर रहा है। ब्रिटेन में गैस की कीमतें 140 प्रतिशत तक बढ़कर 171.34 पेंस प्रति थर्म तक पहुंच गई हैं।
कीमतों में उछाल की 2 बड़ी वजह
- कतर का LNG हब प्रभावित ईरानी हमलों में कतर का सबसे बड़ा LNG हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी प्रभावित हुआ है। यह प्लांट दुनिया की करीब 20 प्रतिशत गैस सप्लाई करता है। हमले के बाद इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे सप्लाई बाधित हो गई है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब असुरक्षित हो गया है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। मौजूदा हालात को देखते हुए तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। भारत के लिए यह और भी चिंता की बात है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत LNG इसी मार्ग से आयात करता है।
कच्चे तेल के बेंचमार्क और इंडियन बास्केट
दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें मुख्य रूप से ब्रेंट, WTI और OPEC बास्केट के आधार पर तय होती हैं। भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदता है और इनकी औसत कीमत को ‘इंडियन बास्केट’ कहा जाता है।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल, गैस और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा दबाव पड़ेगा।







